Skip to content
UK Fast Khabar

UK Fast Khabar

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

Categories

  • Biography
  • BJP
  • blog
  • Business
  • CONGRESS
  • crime
  • Dehardun
  • Economy
  • employment
  • Model
  • National
  • New tehri
  • News
  • Newsbeat
  • Politics
  • Stories
  • Tech
  • Uncategorized
  • World
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अपराध
  • अल्मोड़ा
  • आपका शहर
  • आपदा
  • इतिहास
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तरकाशी
  • उत्तरराखंड विधानसभा
  • उत्तराखंड
  • उत्तराखण्ड
  • ऊधम सिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • क्राइम
  • खबर हटकर
  • खेल
  • गैरसैण
  • चमोली
  • चम्पावत
  • चलो चले देवभूमि
  • चारधाम
  • चारधाम यात्रा
  • जम्मू-कश्मीर
  • टिहरी
  • टेक्नॉलॉजी
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • ताज़ा ख़बर
  • ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देश
  • देश-विदेश
  • देहरादून
  • देहरादून/मसूरी
  • धर्म-संस्कृति
  • धामी सरकार
  • नई दिल्ली
  • नैनीताल
  • न्यूज़
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पुलिस
  • बाजार
  • बिहार
  • भारत
  • मनोरंजन
  • मसूरी
  • मुंबई
  • मौसम
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • रुड़की
  • रुद्रपुर
  • रुद्रप्रयाग
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • विदेश
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • शिक्षा/रोजगार
  • श्रीनगर
  • सेना
  • सोशल मीडिया वायरल
  • स्वास्थ्य
  • हरिद्वार
  • हल्द्वानी
Primary Menu
  • Home
  • उत्तराखंड
  • देहरादून/मसूरी
  • भारत
  • विदेश
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • सोशल मीडिया वायरल
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • खेल
  • News
Live

ग्लोबल वार्मिंग का भूकंप कनेक्शन, वैज्ञानिकों ने कहा पिघलते ग्लेशियर बढ़ा रहे टेंशन! जानिए कैसे?

Uk Fast Khabar August 29, 2026

क्लाइमेट चेंज से पिघलते ग्लेशियर कई कुदरती खतरों के साथ भूकंप के लिए बड़ी टेंशन बनाते जा रहे हैं. रिपोर्ट- रोहित सोनी-

देहरादून (उत्तराखंड): ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों से इस वक्त पूरी दुनिया चिंतित है. नेपाल जैसी त्रासदियां उसका एक उदाहरण हैं. अभी तक माना जा रहा था कि क्लाइमेट चेंज की वजह से जो ग्लोबल वार्मिंग हो रही है, उसका असर सीधे तौरे पर ग्लेशियर पर पड़ रहा है, जिस कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जो भविष्य के बहुत खतरनाक है. लेकिन अब इससे भी बड़ी चिंता की बात सामने आई है. रिसर्च में सामने आया है कि ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार के साथ ही भूकंपों का खतरा बढ़ सकता है. दूसरे शब्दों में कहें तो भविष्य में भूकंप आने की फ्रीक्वेंसी बढ़ सकती है. ईटीवी भारत आज इसी के बारे में विस्तार से बताएगा.

ग्लोबल वार्मिंग से हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे बदलाव का असर सिर्फ बर्फ, पानी और मौसम पर नहीं बल्कि भूकंप जैसी भू-भौतिक घटनाओं पर भी पड़ सकता है. उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्यों के लिए तो यह बहुत की ज्यादा चिंता पैदा करने वाली रिसर्च है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं, जिससे भू-भाग पर पड़ने वाला दबाव बढ़ता जा रहा है. यानी जब भारी बर्फ पिघलती है तो पृथ्वी की क्रस्ट (पपड़ी) पर तनाव में बदलाव देखने को मिलता है, जिसे वैज्ञानिक लोड राइडस्ट्रेस परिवर्तन (Load-Read stress) कहते हैं.

उत्तराखंड में 6 महीने में 35 बार डोली धरती: नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के अलग-अलग हिस्सों में पिछले 6 महीने यानी एक मार्च से 28 अगस्त 2026 तक 35 बार भूकंप के झटके महसूस हुए हैं. ये सभी भूकंप उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, गढ़वाल, चमोली और उत्तरकाशी जिले में महसूस हुए.

  • उत्तराखंड में साल 2026 में आए 35 भूकंप में से सबसे बड़ा भूकंप 19 जून को पिथौरागढ़ जिले में 3.9 मैग्नीट्यूट का आया था.
  • इसके साथ ही पांच अप्रैल को बागेश्वर जिले में 3.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था.
  • इसके अलावा प्रदेश के अंदर तमाम क्षेत्रों में आए भूकंप की तीव्रता 3.6 या फिर उससे कम मैग्नीट्यूड की थी.

बढ़ रहा खतरा: भले ही ये छोटे-छोटे भूकंप भू-गर्भ की एनर्जी को धीरे-धीरे रिलीज कर रहे हो, लेकिन सिस्मिक गैप की वजह से भू-गर्भ में एकत्र एनर्जी को रिलीज करने में इस तरह के भूकंप कोई खास भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं.

सिस्मिक गैप (Seismic Gap) भूकंपीय क्षेत्र का वह हिस्सा है, जहां लंबे समय से कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है, जबकि आसपास के हिस्सों में भूकंप आते रहे हैं.

वैज्ञानिकों की टेंशन: ऐसे में साइंटिस्ट इस बात की आशंका जता रहे हैं कि ग्लेशियर पिघलने की वजह से दबे हुए या तनाव में पड़े फॉल्ट लाइनों पर नया तनाव पैदा हो सकता है, जो कभी-कभी छोटे भूकंपों या कुछ दशकों में बड़े भूकंप की सक्रियता बढ़ाने का कारण बन सकता है. इसके साथ ही भारी बारिश और बाढ़ जैसी घटनाएं भी चट्टानों की स्थिरता (Rock Stability) प्रभावित कर सकती हैं, जिससे भूकंपीय झटके के साथ-साथ भूस्खलन जैसी जोखिम बढ़ जाते हैं. इसको लेकर कई संस्थाओं के वैज्ञानिक अलग-अलग अध्ययन कर रहे हैं.

पहाड़ी फॉल्ट लाइन्स का मतलब पृथ्वी की पपड़ी या चट्टानों में पड़ी ऐसी दरारें होती हैं, जिनके दोनों ओर के हिस्से हलचल के कारण अपनी जगह से खिसक जाते हैं.

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के वैज्ञानिक भी इन पहलुओं पर गहनता से अध्ययन कर रहे हैं, ताकि एक बेहतर निष्कर्ष निकाला जा सके. फिलहाल वीडिया इंस्टीट्यूट समेत अन्य संस्थाओं की शुरुआती रिसर्च में कुछ अहम बातें निकलकर सामने आई हैं.

भूकंपीय जोखिमों की आशंका बढ़ी: वीडिया के वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लेशियर पिघलने से नदियों का जल स्तर भी तेजी से बढ़ता है. साथ ही पानी ढलानों पर पानी एकत्र होता है. इसके साथ ही मिट्टी का संतुलन बिगड़ता है, सभी चीजें एक तरह से भूकंपीय जोखिमों की आशंका को और अधिक बढ़ाते हैं.

इसी ऐसे समझते हैं कि उत्तराखंड में पहाड़ी फॉल्ट लाइन्स मौजूद है. अगर इस भू-भाग पर तनाव का नया पैटर्न बनता है, तो कुछ क्षेत्रों में भूकंपीय सक्रियता (Seismic Activity) में बदलाव आ सकता है. यहां ये भी बताना जरूरी है कि भूकंपों की फ्रीक्वेंसी पूरी तरह से क्लाइमेट पर निर्भर नहीं है, लेकिन ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और अधिक तीव्र मौसमी घटनाएं जैसे बढ़ता तापमान, भारी वर्षा और बाढ़, सूखा और वनाग्नि स्थानीय भूकंपीय घटनाओं को बढ़ा जरूर देती है.

भूकंपीय सक्रियता किसी विशेष क्षेत्र में एक निश्चित समय के दौरान आने वाले भूकंपों की आवृत्ति (frequency of earthquakes), प्रकार और तीव्रता को दर्शाती है.

बदल सकती है भूकंप की फ्रीक्वेंसी: वैज्ञानिकों का मानना है कि कई मॉडलों और केस स्टडीज से संकेत मिलते हैं कि ग्लेशियर-लोडिंग में बदलाव और तेज हिमनद पिघलाव के कारण कुछ क्षेत्रों में भूकंप की फ्रीक्वेंसी बदल सकती है. लेकिन ये हर जगह हो ऐसा जरूरी नहीं है. हां ये जरूर है कि ग्लोबल वार्मिंग भूकंपीय घटनाओं का एक संभावित कारण बन सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ग्लेशियर और फॉल्ट लाइनें एक साथ मौजूद हैं. ऐसे में भूकंप और भूस्खलन जोखिम वाले क्षेत्रों की ज़मीन से जुड़ी संवेदनशीलता (जैसे ग्लेशियर के निकट, नदियों के किनारे, ढलानों पर बसे गांव) का फिर से आकलन करने की जरूरत है. साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर को भूकंपरोधी बनाए जाने की जरूरत है.

ग्लेशियर-लोडिंग (Glacier Loading) भू-विज्ञान और भूभौतिकि (Geophysics) की एक प्रक्रिया है जिसमें ग्लेशियरों या बर्फ की विशाल चादरों (Ice Sheets) के भारी वजन के कारण पृथ्वी की पपड़ी (Crust) पर दबाव पड़ता है

उत्तराखंड के लिए लोड राइडस्ट्रेस परिवर्तन महत्वपूर्ण: उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश भर के सभी हिमालय क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति यह है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, लेकिन उत्तराखंड के लिए “लोड राइडस्ट्रेस परिवर्तन” इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि, उत्तराखंड के हिमालय से मेन सेंट्रल थ्रस्ट (Main Central Thrust – MCT) होकर ही गुजर रही है, जो कि एक अत्यंत संवेदनशील और सक्रिय भूवैज्ञानिक भ्रंश रेखा (Fault Line) है. यह Fault Line उत्तराखंड में बृहद हिमालय (Greater Himalaya) और लघु मध्य हिमालय (Lesser Middle Himalaya) को एक-दूसरे से अलग करती है. इसी कारण यहां आए दिन भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं.

उत्तराखंड में 200 सालों से नहीं आया बड़ा भूकंप: वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता ये है कि उत्तराखंड में बीते 200 सालों में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है. ऐसे में उत्तराखंड रीजन के भूगर्भ में लंबे समय से एनर्जी एकत्र हो रही है और वो भूकंप के रूप में कब रिलीज होगी, इसके बारे में कुछ भी सटीक नहीं कहा सकता है. ऐसे एनर्जी विनाशकारी भूकंप का बड़ा कारण बन सकती है.

क्लाइमेट चेंज का असर मानसून चक्र पर पड़ रहा है, जिसके चलते सी (Sea) लेवल बदल रहा है और हीट वेव जनरेट हो रही है. प्रकृति का जो भी प्रोसेस है, वो आपस में जुड़ा हुआ है. इसी को देखते हुए फिलहाल ये कहा जा सकता है कि क्लाइमेट चेंज का असर भूकंप पर भी पड़ रहा है. क्योंकि कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां पहले कही भूकंप नहीं आते थे, लेकिन अब वहां भूकंप आ रहे है. इसमें ग्रीनलैंड देश भी शामिल है.
-डॉ विनीत कुमार गहलोत, निदेशक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी-

अंटार्कटिक में भी भूकंप की बात सामने आई: वाडिया इंस्टीट्यूट निदेशक डॉ विनीत कुमार गहलोत की मानें तो कुछ वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक में भी भूकंप आने की बात कही है, जिसका कारण क्लाइमेट चेंज से ही जोड़ा रहा है. फिलहाल साइंटिस्ट जिस थ्योरी पर काम कर रहे हैं, उसके अनुसार यही कहा जा सकता है कि

क्लाइमेट चेंज हुआ, जिसके चलते उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियर पिघले और उस कारण से सतह से लोड हट गया. जिसके चलते भूकंप आया है. ऐसे में क्लाइमेट चेंज का असर बिल्कुल पड़ रहा है, यानी जब पृथ्वी की सतह पर भार कम होगा तो वो ऊपर की ओर उठेगी. जिसे वैज्ञानिक भाषा में ग्लेशियल रिबाउंड (Glacial Rebound) या फिर आइसोस्टैटिक रीबाउंड (Isostatic Rebound) कहा जाता है. ऐसे में जमीनी सतह के ऊपर उठने की वजह से इम्बैलेंस आएगा, जिसके चलते भूकंप आते हैं.
-डॉ विनीत कुमार गहलोत, निदेशक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी-

क्लाइमेट चेंज होने की वजह से ग्लेशियर के पिघलने और जमीनी सतह पर भार काम होने के चलते क्या टेक्टोनिक प्लेट्स के मूवमेंट पर भी कोई असर पड़ेगा? इस सवाल पर डॉ विनीत गहलोत में कहा कि

इसमें कोई शक की बात नहीं है कि आइसोस्टैटिक एडजस्टमेंट काफी डीप लेवल तक जाता है, लेकिन टेक्टॉनिक प्लेट्स के मूवमेंट्स पर इसका असर ना के बराबर ही पड़ेगा. लेकिन ये जरूर है कि भविष्य में अगर अधिकांश ग्लेशियर पिघल जाते हैं, तो इसका असर टेक्टॉनिक प्लेट्स के मूवमेंट पर पड़ेगा.-
-डॉ विनीत कुमार गहलोत, निदेशक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, उत्तराखंड-

उत्तराखंड में 7 मैग्नीट्यूड के बड़े भूकंप की आशंका: वहीं, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के भू- वैज्ञानिक डॉ नरेश कुमार ने कहा कि हिमालय में 7 मैग्नीट्यूड से बड़े भूकंप के आने की संभावना है और इसके लिए पूरा उत्तराखंड संवेदनशील है.

अभी तक जो अध्ययन में देखा जो देखा गया है, उसके अनुसार स्ट्रॉन्ग अर्थक्वेक (तेज भूकंप) हो या बड़े अर्थक्वेक (मैग्निट्यूड या आकार में बड़ा) उसका रीजन हायर हिमालय में ही रहता है, जिसमें उत्तराखंड का चमोली, उत्तरकाशी, हिमचाल का कांगड़ा रीजन और नेपाल का काठमांडू शामिल है.
-डॉ नरेश कुमार, भू वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, उत्तराखंड-

डॉ नरेश कुमार के अनुसार इंडियन प्लेन में करीब 10 से 15 किलोमीटर नीचे रैंप स्ट्रक्चर है, जिसके चलते भूकंप आने की आशंका रहती है. एक तरह के कहा जाए तो इस इलाके में बड़े और छोटे भूकंप का रीजन होता है. पिछले 50 सालों के दौरान किए गए अध्ययन में पाया गया कि हिमालय हाई सिस्मिक बेल्ट, जो उच्च हिमालय से होकर यानी एमसीटी के नज़दीक से जाती है, वहां पर भूकंप आने की आशंका ज्यादा है. हिमालय हाई सिस्मिक बेल्ट पृथ्वी के सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील और सक्रिय क्षेत्रों में से एक है, जिसे नए भूगर्भीय आकलन में सबसे उच्चतम जोखिम वाले ‘जोन VI’ (Zone VI) में रखा गया है.

Continue Reading

Previous: UGC-NET जून 2026 का रिजल्ट घोषित, तीन विषयों के लिए सितंबर में होगी परीक्षा दोबारा
Next: उत्तराखंड में भीषण सड़क हादसा, गहरी खाई में गिरी कार, 5 लोग गंभीर घायल

Related Stories

Apple ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ के लिए दिया डोनेशन, टिम कुक ने किया राहत कार्यों का ऐलान

Apple ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ के लिए दिया डोनेशन, टिम कुक ने किया राहत कार्यों का ऐलान

August 29, 2026
जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

August 29, 2026
जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

August 29, 2026
https://youtu.be/mr6MrumB0_k

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

You may have missed

Apple ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ के लिए दिया डोनेशन, टिम कुक ने किया राहत कार्यों का ऐलान

Apple ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ के लिए दिया डोनेशन, टिम कुक ने किया राहत कार्यों का ऐलान

August 29, 2026
जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

August 29, 2026
जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज

August 29, 2026
प्रदेश के पहले खेल यूनिवर्सिटी का आज सीएम धामी करेंगे शिलान्यास, खेल प्रतिभाओं को लगेंगे पंख

प्रदेश के पहले खेल यूनिवर्सिटी का आज सीएम धामी करेंगे शिलान्यास, खेल प्रतिभाओं को लगेंगे पंख

August 29, 2026

About Us

Founder – INDRA
Website – www.ukfastkhabar.com
Email – ukfastkhabar@gmail.com
Phone – +91-9917070725
Address –Naithani House, Lane No. 4 Devpuram Enclave, Badripur, Dehradun, 208005, Uk

Categories

BJP blog Dehardun National News Newsbeat Politics Tech World अपराध आपका शहर उत्तरकाशी उत्तराखंड ऋषिकेश क्राइम खबर हटकर खेल चारधाम चारधाम यात्रा टेक्नॉलॉजी ट्रेंडिंग खबरें ताज़ा ख़बर ताज़ा ख़बरें दिल्ली दुर्घटना देश-विदेश देहरादून देहरादून/मसूरी धर्म-संस्कृति धामी सरकार नैनीताल न्यूज़ पर्यटन बाजार भारत मनोरंजन मौसम राजधानी दिल्ली राजनीति रुद्रपुर विदेश शिक्षा सोशल मीडिया वायरल स्वास्थ्य हरिद्वार

Recent Posts

  • Apple ने नेपाल-तिब्बत बाढ़ के लिए दिया डोनेशन, टिम कुक ने किया राहत कार्यों का ऐलान
  • जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज
  • जजों को भी नहीं छोड़ रहे ठग, जिला जज के नाम पर फेक WhatsApp अकाउंट बनाकर मांगे पैसे, केस दर्ज
  • प्रदेश के पहले खेल यूनिवर्सिटी का आज सीएम धामी करेंगे शिलान्यास, खेल प्रतिभाओं को लगेंगे पंख
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Copyright ©Uk Fast Khabar 2023, Design & Develop by Manish Naithani (9084358715). All rights reserved. | MoreNews by AF themes.