Skip to content
UK Fast Khabar

UK Fast Khabar

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

Categories

  • Biography
  • BJP
  • blog
  • Business
  • CONGRESS
  • crime
  • Dehardun
  • Economy
  • employment
  • Model
  • National
  • New tehri
  • News
  • Newsbeat
  • Politics
  • Stories
  • Tech
  • Uncategorized
  • World
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अपराध
  • अल्मोड़ा
  • आपका शहर
  • आपदा
  • इतिहास
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तरकाशी
  • उत्तरराखंड विधानसभा
  • उत्तराखंड
  • उत्तराखण्ड
  • ऊधम सिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • क्राइम
  • खबर हटकर
  • खेल
  • गैरसैण
  • चमोली
  • चम्पावत
  • चलो चले देवभूमि
  • चारधाम
  • चारधाम यात्रा
  • जम्मू-कश्मीर
  • टिहरी
  • टेक्नॉलॉजी
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • ताज़ा ख़बर
  • ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देश
  • देश-विदेश
  • देहरादून
  • देहरादून/मसूरी
  • धर्म-संस्कृति
  • धामी सरकार
  • नई दिल्ली
  • नैनीताल
  • न्यूज़
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पुलिस
  • बाजार
  • बिहार
  • भारत
  • मनोरंजन
  • मसूरी
  • मुंबई
  • मौसम
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • रुड़की
  • रुद्रपुर
  • रुद्रप्रयाग
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • विदेश
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • शिक्षा/रोजगार
  • श्रीनगर
  • सेना
  • सोशल मीडिया वायरल
  • स्वास्थ्य
  • हरिद्वार
  • हल्द्वानी
Primary Menu
  • Home
  • उत्तराखंड
  • देहरादून/मसूरी
  • भारत
  • विदेश
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • सोशल मीडिया वायरल
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • खेल
  • News
Live

उत्तराखंड में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन का बनेगा मैप, पहली बार सैटेलाइट से पता चलेगा संवेदनशील क्षेत्र

Uk Fast Khabar September 3, 2026

उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र राज्य में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन की मैपिंग करेगा, सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग तकनीक अपनाई जाएगी, नवीन उनियाल की रिपोर्ट

देहरादून: उत्तराखंड में पहली बार प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन की मैपिंग होने जा रही है. इसके जरिए राज्यभर में कौन से क्षेत्र प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन के रूप में विकसित हुए, इसका सटीक आकलन हो सकेगा. खास बात यह है कि इसके जरिए भविष्य में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन को लेकर आगामी रूपरेखा भी तैयार की जा सकेगी और इसी के अनुरूप नई योजनाओं को भी तैयार किया जा सकेगा. जानिए राज्य भर में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन को लेकर USAC की क्या है योजना.

उत्तराखंड में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन का बनेगा मैप: पर्यटन और तीर्थाटन के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले उत्तराखंड के सामने प्लास्टिक कचरा बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. शहरों से लेकर पर्यटन स्थलों और उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक प्लास्टिक पहुंचने की समस्या सामने आ रही है. अब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र यानी USAC राज्यभर में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन की मैपिंग करने जा रहा है. सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां प्लास्टिक कचरे का जमाव अधिक है. इस मैपिंग के बाद संवेदनशील क्षेत्रों के उपचार, सफाई, कचरे के प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार हो सकेगा.

पर्यटन प्रदेश के लिए प्लास्टिक कचरा बना चुनौती: उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश कहा जाता है, लेकिन यही पर्यटन अब राज्य के लिए प्लास्टिक कचरे की एक बड़ी चुनौती भी बनता जा रहा है. पहाड़ों के शहर हों, तीर्थ स्थल हों, पर्यटक मार्ग हों या फिर ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र, कई जगह प्लास्टिक कचरे का दबाव लगातार दिखाई दे रहा है. समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पहाड़ी भूगोल में कचरे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक कठिन है.

आंकड़ों ने बढ़ाई परेशानी: इस चुनौती का एक आधिकारिक संकेत राज्य में पैदा होने वाले प्लास्टिक कचरे के आंकड़ों से भी मिलता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2021-22 की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में अनुमानित प्लास्टिक कचरा उत्पादन 44,924.71 टन प्रतिवर्ष था. यानी औसतन करीब 123 टन प्लास्टिक कचरा प्रतिदिन. इससे एक साल में पैदा होने वाले प्लास्टिक कचरे के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है.

कम समय में दोगुने से ज्यादा हो गया प्लास्टिक कचरा: इससे पहले राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर 2020-21 में प्लास्टिक कचरे का आंकड़ा 18,647.75 टन बताया गया था. इस तरह 2021-22 में रिपोर्ट किया गया आंकड़ा एक साल में दोगुने से भी अधिक हो गया था. उत्तराखंड हाईकोर्ट में साल 2023 में हुई सुनवाई के दौरान भी इन आंकड़ों का उल्लेख हुआ था. अदालत ने पहाड़ी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन को बड़ी चुनौती माना था. अदालत के रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि पहाड़ी इलाकों में प्लास्टिक कचरा गड्ढों, नालों, ढलानों और नदी-नालों के आसपास जमा हो जाता है, जहां इसे हटाना आसान नहीं होता.

अब वैज्ञानिक तरीके से तलाशे जाएंगे प्लास्टिक डंपिंग जोन: इसी चुनौती को देखते हुए उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (Uttarakhand Space Applications Centre) ने राज्य में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन की मैपिंग की पहल शुरू की है. USAC के वैज्ञानिक सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से उन क्षेत्रों की पहचान करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जहां प्लास्टिक कचरे का जमाव या डंपिंग अधिक है.

USAC के निदेशक दुर्गेश पंत के मुताबिक-

इस दिशा में काम शुरू किया जा चुका है. राज्य के अलग-अलग जिलों में प्लास्टिक बेस्ड डंपिंग जोन का मैप तैयार किया जा रहा है. मैपिंग पूरी होने के बाद यह पता लगाने में मदद मिलेगी, कि राज्य में प्लास्टिक कचरे के लिहाज से कौन-कौन से क्षेत्र संवेदनशील हैं.
–दुर्गेश पंत, निदेशक, उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र-

ये होगी प्रोजेक्ट की खासियत: इस प्रोजेक्ट की खासियत सिर्फ डंपिंग साइट की पहचान करना ही नहीं होगी. मैप तैयार होने के बाद यह भी देखा जा सकेगा, कि प्लास्टिक कचरा किन क्षेत्रों में अधिक एकत्र हो रहा है. कौन से क्षेत्र पर्यटन या तीर्थाटन के कारण अधिक दबाव में हैं. किन स्थानों पर भविष्य में विशेष प्रबंधन की जरूरत है.

डंपिंग जोन की मैपिंग से बनेगा ट्रीटमेंट प्लान: दरअसल अभी प्लास्टिक कचरे को हटाने की चुनौती का एक बड़ा कारण यह भी है कि हर क्षेत्र में कचरे की वास्तविक स्थिति का एकीकृत वैज्ञानिक नक्शा उपलब्ध नहीं है. सैटेलाइट आधारित मैपिंग के बाद अलग-अलग क्षेत्रों को उनकी संवेदनशीलता के आधार पर चिन्हित करने में मदद मिल सकती है. इसके आधार पर संबंधित विभाग यह तय कर सकेंगे कि कहां नियमित सफाई अभियान की जरूरत है, कहां कचरे के संग्रहण की व्यवस्था मजबूत करनी है. कहां प्लास्टिक मैनेजमेंट यूनिट या रिकवरी सिस्टम की जरूरत है और किन इलाकों में पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है.

यानी यह प्रोजेक्ट केवल मौजूदा प्लास्टिक डंपिंग की तस्वीर तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट की योजनाओं के लिए बेस मैप के तौर पर भी काम कर सकता है.

शहरों के साथ पर्यटन मार्ग भी चिंता: उत्तराखंड में प्लास्टिक की समस्या केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं है. राज्य में बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं. उत्तराखंड पर्यटन विभाग के वर्ष 2024 के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अकेले देहरादून में 64.92 लाख, ऋषिकेश में 9.69 लाख, मसूरी में 21.35 लाख और केदारनाथ में 16.54 लाख पर्यटक पहुंचे. यानी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों की संख्या ही कई लाख में है.

इतने बड़े पर्यटक दबाव के साथ प्लास्टिक पैकेजिंग, बोतल, खाद्य सामग्री के रैपर और दूसरे प्लास्टिक उत्पादों के इस्तेमाल के बाद उनका संग्रहण और निस्तारण बड़ी चुनौती बन जाता है. खासतौर पर उन मार्गों पर जहां नियमित कचरा उठान और परिवहन की व्यवस्था कठिन है.

हाई हिमालय और बुग्याल तक पहुंचा प्लास्टिक: प्लास्टिक की चुनौती अब सिर्फ शहरों और सड़क किनारे तक सीमित नहीं है. वन विभाग के CCF पर्यावरण सुशांत पटनायक के मुताबिक-

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी प्लास्टिक की मौजूदगी दिखाई दे रही है. पर्यटकों और ट्रेकिंग गतिविधियों के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों और बुग्यालों तक प्लास्टिक पहुंचने की चिंता सामने आई है.
-सुशांत पटनायक, CCF, पर्यावरण-

उच्च हिमालय में प्लास्टिक का पहुंचना इसलिए ज्यादा संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यहां पर्यावरणीय परिस्थितियां बेहद नाजुक हैं. ऐसे क्षेत्रों में कचरे को वापस नीचे लाना भी कठिन होता है. इसलिए विभाग की ओर से इन क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए योजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है.

पहले से चल रही व्यवस्था को मिलेगी वैज्ञानिक लोकेशन: प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए राज्य में पहले से कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं. केंद्रीय स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के दिशानिर्देशों में ब्लॉक स्तर पर Plastic Waste Management Unit स्थापित करने और गांवों से एकत्र प्लास्टिक को इन केंद्रों तक पहुंचाने का प्रावधान है. इन इकाइयों में प्लास्टिक को अलग करने और आगे रिसाइक्लिंग या दूसरे उपयोग के लिए भेजने की व्यवस्था की जा सकती है.

ऐसे में USAC की प्रस्तावित मैपिंग इन व्यवस्थाओं को वैज्ञानिक लोकेशन देने में उपयोगी हो सकती है. उदाहरण के लिए यदि किसी पर्यटन मार्ग या नदी घाटी में प्लास्टिक कचरे का जमाव लगातार सामने आता है, तो संबंधित विभाग उस क्षेत्र में संग्रहण केंद्र, परिवहन व्यवस्था या नियमित सफाई की योजना को प्राथमिकता के आधार पर तैयार कर सकता है.

प्लास्टिक रिसाइक्लिंग नेटवर्क भी मौजूद: राज्य में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए रिसाइक्लिंग इकाइयां भी पंजीकृत हैं. केंद्रीय स्वच्छ भारत मिशन के उपलब्ध राज्यवार रिकॉर्ड में उत्तराखंड की विभिन्न प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग इकाइयों को सूचीबद्ध किया गया है. इनमें हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र की कई इकाइयां शामिल हैं.

सबसे बड़ा फायदा, डंपिंग जोन का वैज्ञानिक रिकॉर्ड: USAC की इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है, कि पहली बार प्लास्टिक डंपिंग की समस्या को केवल विभागीय निरीक्षण या स्थानीय रिपोर्ट के आधार पर देखने के बजाय, उसे जियो-स्पेशियल डेटा से जोड़ा जा सकेगा.

प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड की दिशा में बेस मैप: दरअसल उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में प्लास्टिक कचरे का समाधान केवल प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने से संभव नहीं है. इसके लिए कचरे की वास्तविक लोकेशन, मात्रा, संग्रहण, परिवहन, रिसाइक्लिंग और अंतिम निस्तारण, इन सभी स्तरों पर एकीकृत योजना की जरूरत है.

राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध पहले से लागू है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसके अनुपालन की निगरानी करता है. केंद्रीय रिपोर्ट के अनुसार 2021-22 में राज्य में 41 प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग/रिसाइक्लिंग इकाइयां, एक कम्पोस्टेबल प्लास्टिक यूनिट और 24 मल्टीलेयर प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट दर्ज थीं.

USAC की सैटेलाइट मैपिंग देगी वैज्ञानिक आधार: अब USAC की सैटेलाइट मैपिंग इस पूरी व्यवस्था को एक नया वैज्ञानिक आधार दे सकती है. कौन सा क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील है, कहां प्लास्टिक जमा हो रहा है, कहां से इसे हटाना प्राथमिकता होनी चाहिए और भविष्य में किन क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रबंधन व्यवस्था विकसित करनी है, इन सवालों का जवाब तैयार होने वाले मैप से मिल सकता है.यानी आने वाले समय में उत्तराखंड में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सिर्फ सफाई अभियान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सैटेलाइट डेटा, मैपिंग और वैज्ञानिक प्लानिंग के आधार पर डंपिंग जोन के उपचार की दिशा में आगे बढ़ सकता है. पर्यटन और तीर्थाटन के लगातार बढ़ते दबाव के बीच यही मैप राज्य के लिए प्लास्टिक प्रबंधन का एक अहम बेस मैप साबित हो सकता है.

Continue Reading

Previous: चीन सीमा से सटी दारमा घाटी में लैंडस्लाइड का हाई रिस्क, 9% क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील, जोखिम क्षेत्र में 58 फीसदी आबादी
Next: उत्तराखंड में बीजेपी नेता का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख, जानिए क्या कहा

Related Stories

हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण प्रकरण, खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, राज्यसभा में किया वादा दिलाया याद

हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण प्रकरण, खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, राज्यसभा में किया वादा दिलाया याद

September 3, 2026
नेपाल की तबाही के बाद उत्तराखंड के नदी किनारे बसे शहरों पर सवाल! जानिए फ्लड प्लेन मैपिंग की स्थिति

नेपाल की तबाही के बाद उत्तराखंड के नदी किनारे बसे शहरों पर सवाल! जानिए फ्लड प्लेन मैपिंग की स्थिति

September 3, 2026
उत्तराखंड में बीजेपी नेता का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख, जानिए क्या कहा

उत्तराखंड में बीजेपी नेता का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख, जानिए क्या कहा

September 3, 2026
https://youtu.be/mr6MrumB0_k

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

You may have missed

हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण प्रकरण, खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, राज्यसभा में किया वादा दिलाया याद

हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण प्रकरण, खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, राज्यसभा में किया वादा दिलाया याद

September 3, 2026
नेपाल की तबाही के बाद उत्तराखंड के नदी किनारे बसे शहरों पर सवाल! जानिए फ्लड प्लेन मैपिंग की स्थिति

नेपाल की तबाही के बाद उत्तराखंड के नदी किनारे बसे शहरों पर सवाल! जानिए फ्लड प्लेन मैपिंग की स्थिति

September 3, 2026
उत्तराखंड में बीजेपी नेता का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख, जानिए क्या कहा

उत्तराखंड में बीजेपी नेता का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख, जानिए क्या कहा

September 3, 2026
उत्तराखंड में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन का बनेगा मैप, पहली बार सैटेलाइट से पता चलेगा संवेदनशील क्षेत्र

उत्तराखंड में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन का बनेगा मैप, पहली बार सैटेलाइट से पता चलेगा संवेदनशील क्षेत्र

September 3, 2026

About Us

Founder – INDRA
Website – www.ukfastkhabar.com
Email – ukfastkhabar@gmail.com
Phone – +91-9917070725
Address –Naithani House, Lane No. 4 Devpuram Enclave, Badripur, Dehradun, 208005, Uk

Categories

BJP blog Dehardun National News Newsbeat Politics Tech World अपराध आपका शहर उत्तरकाशी उत्तराखंड ऋषिकेश क्राइम खबर हटकर खेल चारधाम चारधाम यात्रा टेक्नॉलॉजी ट्रेंडिंग खबरें ताज़ा ख़बर ताज़ा ख़बरें दिल्ली दुर्घटना देश-विदेश देहरादून देहरादून/मसूरी धर्म-संस्कृति धामी सरकार नैनीताल न्यूज़ पर्यटन बाजार भारत मनोरंजन मौसम राजधानी दिल्ली राजनीति रुद्रपुर विदेश शिक्षा सोशल मीडिया वायरल स्वास्थ्य हरिद्वार

Recent Posts

  • हल्द्वानी मंच शुद्धिकरण प्रकरण, खड़गे ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र, राज्यसभा में किया वादा दिलाया याद
  • नेपाल की तबाही के बाद उत्तराखंड के नदी किनारे बसे शहरों पर सवाल! जानिए फ्लड प्लेन मैपिंग की स्थिति
  • उत्तराखंड में बीजेपी नेता का निधन, सीएम धामी ने जताया दुख, जानिए क्या कहा
  • उत्तराखंड में प्लास्टिक वेस्ट डंपिंग जोन का बनेगा मैप, पहली बार सैटेलाइट से पता चलेगा संवेदनशील क्षेत्र
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Copyright ©Uk Fast Khabar 2023, Design & Develop by Manish Naithani (9084358715). All rights reserved. | MoreNews by AF themes.