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जंगलों से दिखेगा ब्रह्मांड का नजारा, वन महकमा कर रहा नया पर्यटन मॉडल तैयार

Uk Fast Khabar June 9, 2026

वन विभाग पर्यटन गतिविधियों में एक और पर्यटन मॉडल को जोड़ने जा रहा है. पर्यटकों को ब्रह्मांड का नजारा दिखाने की कोशिश में है.

देहरादून: उत्तराखंड वन विभाग अपनी इको टूरिज्म गतिविधियों को और अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में एक नई पहल की तैयारी कर रहा है. जंगलों की प्राकृतिक शांति और अंधेरे का उपयोग करते हुए विभाग अब पर्यटकों को ब्रह्मांड की अद्भुत दुनिया से रूबरू कराने की योजना बना रहा है. इसके लिए वन विभाग ने एस्ट्रो टूरिज्म को अपने पर्यटन मॉडल में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है. यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो पर्यटक जंगलों के बीच स्थित वन विश्राम गृहों और गेस्ट हाउसों से तारों, ग्रहों और आकाशगंगाओं का दुर्लभ नजारा देख सकेंगे.

पर्यटकों के लिए नया अनुभव: उत्तराखंड में वन विभाग पहले से ही इको टूरिज्म, बर्ड वॉचिंग, नेचर ट्रेल, जंगल सफारी और वाइल्डलाइफ टूरिज्म जैसी गतिविधियां संचालित कर रहा है. लेकिन बदलते पर्यटन ट्रेंड को देखते हुए विभाग अब ऐसे विकल्प तलाश रहा है जो प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को नया अनुभव भी प्रदान करें. इसी कड़ी में एस्ट्रो टूरिज्म को सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है.

क्या होता है एस्ट्रो टूरिज्म: एस्ट्रो टूरिज्म यानी खगोलीय पर्यटन एक ऐसी गतिविधि है जिसमें लोग शहरों की कृत्रिम रोशनी से दूर जाकर रात के समय खुले आसमान में तारों, ग्रहों, नक्षत्रों, मिल्की वे (आकाशगंगा), उल्कापिंड वर्षा और अन्य खगोलीय घटनाओं का अवलोकन करते हैं. इसके लिए आमतौर पर ऐसे स्थान चुने जाते हैं, जहां प्रकाश प्रदूषण बहुत कम हो और आसमान साफ दिखाई देता हो. विशेषज्ञ दूरबीनों और आधुनिक उपकरणों की मदद से पर्यटकों को ब्रह्मांड से जुड़ी जानकारी देते हैं. कई स्थानों पर नाइट स्काई वॉक, स्टार गेजिंग कैंप, एस्ट्रो फोटोग्राफी और खगोलीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. दुनिया के कई देशों में यह पर्यटन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और अब भारत में भी इसकी मांग बढ़ रही है.

जंगल क्यों हैं सबसे बेहतर विकल्प: वन विभाग के अनुसार संरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित अधिकांश गेस्ट हाउस और वन विश्राम गृह शहरों की चकाचौंध से काफी दूर हैं. इन स्थानों पर कृत्रिम रोशनी बेहद कम होती है, जिससे रात के समय आसमान बेहद साफ दिखाई देता है.एस्ट्रो टूरिज्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त कम प्रकाश प्रदूषण है और उत्तराखंड के कई वन क्षेत्र इस मानक पर पूरी तरह खरे उतरते हैं. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वायुमंडलीय प्रदूषण भी अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे तारों और ग्रहों का अवलोकन और बेहतर तरीके से किया जा सकता है.वन विभाग के पास पहले से ही ऐसे कई गेस्ट हाउस और बंगले मौजूद हैं जहां पर्यटक ठहरते हैं. ऐसे में बिना बड़े निर्माण कार्य के इन स्थानों को एस्ट्रो टूरिज्म के लिए विकसित किया जा सकता है.

उत्तराखंड वन विभाग की यह पहल राज्य के पर्यटन क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ सकती है. यदि योजना सफल होती है तो आने वाले समय में पर्यटक केवल जंगलों की जैव विविधता ही नहीं, बल्कि उन्हीं जंगलों से दिखाई देने वाले अनंत ब्रह्मांड का भी अद्भुत नजारा देख सकेंगे.
-पीके पात्रो, सीसीएफ, इको टूरिज्म उत्तराखंड वन विभाग-

निजी विशेषज्ञों के साथ मिलकर होगी शुरुआत: इस दिशा में प्रारंभिक स्तर पर एक प्रस्ताव तैयार किया है. योजना के तहत खगोल विज्ञान और एस्ट्रो टूरिज्म से जुड़े निजी विशेषज्ञों तथा संस्थाओं के साथ साझेदारी की जा सकती है.इन विशेषज्ञों की मदद से दूरबीनें, स्टार मैप, डिजिटल उपकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएंगे. पर्यटकों को रात के समय आकाश में दिखाई देने वाले ग्रहों, तारामंडलों और खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी. इससे सामान्य पर्यटन गतिविधि एक शैक्षणिक और रोमांचक अनुभव में बदल सकती है.

किन क्षेत्रों में शुरू हो सकती है पहल: वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि कॉर्बेट लैंडस्केप के कुछ क्षेत्र, राजाजी टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित वन विश्राम गृह, चकराता वन प्रभाग, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर जिले के कई वन क्षेत्र एस्ट्रो टूरिज्म के लिए उपयुक्त साबित हो सकते हैं.विशेष रूप से वे स्थान जहां रात के समय प्रकाश प्रदूषण बेहद कम है और मौसम अधिकांश समय साफ रहता है, उन्हें प्राथमिकता दी जा सकती है. विभाग पहले चरण में चुनिंदा गेस्ट हाउसों और बंगलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस योजना को शुरू करने पर विचार कर रहा है.

इको टूरिज्म को मिलेगा नया आयाम: एस्ट्रो टूरिज्म को इको टूरिज्म और वाइल्डलाइफ टूरिज्म के साथ जोड़कर एक अनूठा पैकेज तैयार किया जा सकता है. दिन के समय पर्यटक जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग और नेचर ट्रेल का आनंद ले सकते हैं, जबकि रात में तारों भरे आसमान के नीचे ब्रह्मांड की दुनिया को करीब से देख सकते हैं. इससे पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा. स्थानीय युवाओं को गाइड, एस्ट्रो इंटरप्रेटर और हॉस्पिटैलिटी सेवाओं में रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं.

संरक्षण और पर्यटन का संतुलन: वन विभाग का मानना है कि यह गतिविधि पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा दे सकती है क्योंकि इसमें बड़े निर्माण या प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की आवश्यकता नहीं होती. सीमित संसाधनों के साथ पर्यटकों को नया अनुभव उपलब्ध कराया जा सकता है.इसके साथ ही लोगों में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी और प्राकृतिक अंधेरे के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा. बढ़ता प्रकाश प्रदूषण न केवल वन्यजीवों बल्कि खगोलीय अवलोकन पर भी असर डालता है. ऐसे में एस्ट्रो टूरिज्म लोगों को प्रकृति और ब्रह्मांड दोनों के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम बन सकता है.

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