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उत्तराखंड में 1 दिसंबर से शुरू होगी जनगणना, 10-20 फीसदी बढ़ेंगे ब्लॉक्स-कार्मिक, 1.27 करोड़ जनता तक पहुंचेंगे प्रगणक

Uk Fast Khabar September 9, 2026

16 नवंबर से जनता खुद से खुद की गणना कर सकेगी. इसके लिए स्वगणना का विकल्प जनता को दिया जाएगा, रोहित सोनी की रिपोर्ट

देहरादून: देश के अधिकतर राज्यों में जनसंख्या की गणना का कार्य फरवरी महीने में होना है. उत्तराखंड समेत चार राज्यों में जनसंख्या की गणना का कार्य 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है. उससे 15 दिन पहले यानी 16 नवंबर से जनता खुद से खुद की गणना कर सकेगी. इसके लिए स्वगणना का विकल्प जनता को दिया जाएगा.

जनगणना 2027: स्वगणना के बाद प्रगणक, एक दिसंबर से घर-घर जाकर लोगों की गणना करेंगे. जनसंख्या की गणना के लिए हजारों की संख्या पर प्रगणक एवं सुपरवाइजर्स की तैनाती की जाएगी, जो राज्य के करीब 1.27 करोड़ जनता की जानकारी को एकत्र करेंगे. इसके लिए जनगणना कार्य निदेशालय ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी हैं. ऐसे में क्या रणनीति और क्या-क्या शेड्यूल तैयार किए गए हैं, जिसके तहत तैयारियां की जाएगी? देखिए इस खास रिपोर्ट में.

उत्तराखंड में 1 दिसंबर से शुरू होगी जनगणना: उत्तराखंड के हिम आच्छादित क्षेत्रों में जनसंख्या की गणना का कार्य जारी है. इसके तहत, प्रदेश के चार जिलों में स्थित 131 गांवों और तीन शहरों में प्रगणक घर-घर जाकर आबादी की गणना कर रहे हैं. प्रदेश के स्नोबाउंड क्षेत्रों में आबादी की गणना का कार्य 1 सितंबर से शुरू हुआ था जो 30 सितंबर तक चलेगा. प्रदेश के स्नो बाउंड क्षेत्रों में 30 सितंबर को गणना का कार्य संपन्न होने के बाद, प्रदेश के बाकी हिस्सों में आबादी की गणना की तैयारियां तेज हो जाएंगी. प्रदेश में जनगणना के पहले चरण के तहत हुए मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान पापुलेशन अनुमानित 1.27 करोड़ पायी गयी है. एक दिसंबर से शुरू होने जा रही आबादी की गणना के दौरान इन जनसंख्या की गणना की जाएगी.

मकान सूचीकरण और उनकी गणना का कार्य संपन्न हो चुका है: जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत उत्तराखंड राज्य में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य संपन्न हो चुका है. करीब 15 साल बाद हुई जनगणना से पता चला कि उत्तराखंड में परिवारों की संख्या 28.3 लाख के पार हो गई है. यानी इन 15 सालों के भीतर करीब 8.18 लाख परिवारों की संख्या बढ़ गई है. इसी तरह, साल 2011 में हुई जनगणना में उत्तराखंड की पापुलेशन 1.01 करोड़ थी. ये अब बढ़कर करीब 1.27 करोड़ के पार हो गयी है. यानी इन 15 सालों में प्रदेश में 26 लाख से अधिक पापुलेशन बढ़ गई है. इसके अलावा, प्रदेश में आवासीय और गैर आवासीय मकानों की संख्या 45 लाख हो गई है.

विधानसभा चुनाव के चलते उत्तराखंड में जनगणना पहले होगी: देश भर में जनगणना के दूसरे चरण के तहत आबादी की गणना का कार्य फरवरी 2027 में होना है. लेकिन आगामी साल 2027 में देश के कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, जिसके चलते भारत सरकार ने उत्तराखंड समेत चार राज्यों में तय समय से पहले जनसंख्या की गणना कराने का निर्णय लिया है. इसके लिए भारत सरकार ने 5 सितंबर को गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में जनसंख्या की जनगणना 1 दिसंबर से 4 जनवरी, 2027 तक की जाएगी. इसका पुनरीक्षण दौर 5 जनवरी से 9 जनवरी, 2027 तक चलेगा. साथ ही जनगणना के संचालन के लिए, घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले यानी 16 नवंबर से 30 नवंबर, 2026 तक स्व-गणना का विकल्प भी जनता के लिए उपलब्ध रहेगा.

जनगणना कार्य निदेशक ने क्या कहा: ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि-

जनगणना के मुख्य चरण को लेकर देश के चार राज्यों के लिए भारत सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है. इन चार राज्यों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा और पंजाब शामिल हैं. इन राज्यों में फरवरी 2027 में विधानसभा के चुनाव होने हैं, जिसके चलते जनगणना इन चार राज्यों में चुनाव से पहले ही संपन्न हो जाएगी. अधिसूचना के अनुसार, 16 नवंबर से 30 नवंबर तक स्वगणना होगी, जिस दौरान लोग अपनी गणना खुद से कर सकेंगे. इसके बाद 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक यानी 35 दिनों तक प्रगणक घर-घर जाकर, घर में मौजूद एक एक सदस्य की गणना करेंगे.
-इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड-

जनगणना के दौरान होंगे 40 सवाल: जनगणना कार्य निदेशक ने साथ ही बताया कि आबादी की गणना के लिए पहले 33 सवाल थे. अब सवालों को बढ़ाकर 40 सवाल कर दिया गया है. ऐसे में प्रगणक को आबादी की गणना के दौरान एक परिवार में करीब 45 मिनट से एक घंटे का समय लगने की संभावना है. इसके चलते आबादी की गणना के लिए 35 दिन तय किए गए हैं. पूर्व में हुई जनगणना के दौरान 20 दिन का समय निर्धारित होता था, ताकि प्रगणक, जनगणना से संबंधित सभी कामों को पूरा कर सके और एक भी व्यक्ति, गणना से न छूटे. जनगणना में सामान्य घर के साथ ही इंस्टीट्यूशनल हाउस होल्ड में रहने वाले लोगों की गणना की जाएगी. यही नहीं, हाउसलेस पापुलेशन की भी गणना की जायेगी. इसके अलावा, सैन्य और अर्ध सैन्य जवानों की भी गणना की जाएगी.

4 जनवरी 2027 को संपन्न होगा जनगणना कार्य: 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक जनसंख्या की गणना का कार्य संपन्न होने के बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी तक रिविज़नल राउंड चलेगा. इस दौरान प्रगणक दोबारा घर- घर जाकर ये जानकारी लेंगे कि किसी परिवार में सदस्य बढ़े या घटे तो नहीं हैं. इसके बाद ऐप के जरिए उसमें सुधार किया जाता है. साथ ही बताया कि 4 जनवरी और 5 जनवरी 2027 के बीच के मध्यरात्रि को सेंसस मूवमेंट कहा जाएगा. यानी जनगणना की रेफरेंस डेट 5 जनवरी 00:00 बजे मानी जाएगी. साथ ही बताया कि 15 से 20 अक्टूबर 2026 के बीच आबादी की गणना के लिए तैनात होने वाले प्रगणक और सुपरवाइजर्स की ट्रेनिंग जिलों में शुरू कर दी जाएगी.

10 से 20 फीसदी बढ़ सकते हैं ब्लॉक्स: इवा श्रीवास्तव ने बताया कि आबादी की गणना के लिए तैयारी शुरू करने के दौरान सबसे पहले ये देखा जाएगा कि हाउस लिस्टिंग के दौरान प्रदेश में जितने ब्लॉक बनाए गए थे, उसकी तुलना में अब कितने ब्लॉक बढ़ गए हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान जो ब्लॉक बनाए गए थे, वो टेंटेटिव रूप से बनाए गए थे. मकान सूचीकरण की प्रक्रिया मई 2026 में संपन्न होने के बाद, ये जानकारी मिल गई है कि ब्लॉक में कितने लोग रह रहे हैं. उसी आधार पर अब नए सेंसस ब्लॉक्स तैयार किए जाएंगे. साथ ही बताया कि आबादी की गणना के दौरान करीब 10 से 20 फीसदी ब्लॉक्स की संख्या बढ़ जाएगी. ऐसे में कार्मिकों की संख्या में भी करीब 10 से 20 फीसदी तक बढ़ने की संभावना है.

जनगणना के दौरान 35 हजार कर्मचारी होंगे तैनात: मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान करीब 20 हज़ार प्रगणक और 3500 सुपरवाइजर्स की तैनाती की गई थी. इसके अलावा, 3000 रिज़र्व कर्मचारी तैनात किए गए थे. ऐसे में आबादी की गणना के दौरान, प्रगणक, सुपरवाइजर्स और रिज़र्व कर्मचारी को मिलकर करीब 35 हज़ार कर्मचारी लगने की उम्मीद है. इन सभी कार्मिकों की व्यवस्था राज्य सरकार की ओर से की जाती है. ऐसे में निदेशालय के स्तर से पहले ही तय कर लिया जाएगा कि कितनी बढ़ोत्तरी हो रही है. उसी आधार पर जिलों और नगर निगम को कर्मचारियों की सूची उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दे देते हैं. मकान सूचीकरण के दौरान जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, उन कर्मचारियों के साथ नए कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगाई जा सकती है.

सैन्य और अर्धसैनिक बलों की जनगणना ऐसे होगी: सैन्य और अर्धसैनिक बलों की गणना के लिए कार्य प्रणाली पहले से ही तय है. इसके तहत, राष्ट्रीय स्तर पर उनके नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं. इसके बाद राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं. ऐसे में बीआरओ, आईटीबीपी, एसएसबी समेत अन्य सैन्य और अर्धसैनिक बलों के अलग-अलग राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी रहेंगे. इनके जितने भी कैंपस हैं, वहां के लिए चार्ज अधिकारी नियुक्त करेंगे. फिर अपने ही कर्मचारियों को प्रगणक और सुपरवाइजर्स नियुक्त करेंगे. ऐसे में जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से इन सभी प्रगणक और सुपरवाइजर्स को एक दिन की ट्रेनिंग दी जाएगी.

ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद यह सभी प्रगणक और सुपरवाइजर्स, इन सभी ऑर्गनाइजेशन के कैंप में रहने वाले जवानों की गणना करेंगे. सैन्य और अर्धसैनिक बलों के लिए सवालों की संख्या आम जनता से कम होती है. इन लोगों की गणना डिजिटल यानी ऐप के माध्यम से नहीं होगी, बल्कि ऑफलाइन माध्यम से होगी. इसके बाद इन सभी डाटा को एक करने के बाद फिर बहुत ही सिक्योर्ड तरीके से सेंट्रलाइज्ड कर संबंधित चार्ज अधिकारी द्वारा पोर्टल पर संख्या को अपलोड किया जाएगा. सैनिकों की संख्या एक सेंसिटिव मामला है, लिहाजा पूरी सुरक्षा के साथ सैनिकों की जानकारी को जनगणना पोर्टल पर अपडेट किया जाता है.

कैंटोनमेंट बोर्ड की जनगणना: इवा श्रीवास्तव ने साथ ही बताया कि-

उत्तराखंड में जितने भी कैंटोनमेंट बोर्ड हैं, वो सभी मकान सूचीकरण का हिस्सा रहते हैं. ऐसे में कैंटोनमेंट बोर्ड के जो सीईओ होते हैं, वही चार्ज ऑफिसर होते हैं. यह सभी जिलाधिकारी के अंदर आते हैं. ऐसे में कैंटोनमेंट बोर्ड के लिए कोई अलग स्पेशल चार्ज नहीं होते हैं. लिहाजा वो नगर पालिका या नगर निगम की तरह ही ट्रीट किए जाते हैं.
-इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड-

सैन्य और अर्धसैनिक बलों के जो दूसरे कैंप होते हैं, जहां पर जवानों के साथ ही उनके परिवार भी रहते हैं, उन लोगों की गणना संबंधित आर्गनाइजेशन की ओर से नियुक्त किए गए प्रगणक और सुपरवाइजर्स ही करते हैं. डिफेंस फोर्सेस के लोगों से कम सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन उनके परिवारों से 40 सवाल ही पूछे जाएंगे.

जनगणना के दौरान इन 40 सवालों के देने होंगे जवाब

• व्यक्ति का नाम
• मुखिया से संबंध
• लिंग (पुरुष/स्त्री/अन्य)
• जन्मतिथि/ उम्र
• वर्तमान वैवाहिक स्थिति (हां/नहीं)
• विवाह के समय उम्र
• जीवनसाथी का नाम
• घोषित राष्ट्रीयता
• धर्म
• एसी/ एसटी/ जाति का नाम
• पिता का नाम, उम्र, जन्म स्थान विवरण, प्रदेश और जिला
• माता का नाम, उम्र, जन्म स्थान विवरण, प्रदेश और जिला
• विकलांगता (हां/नहीं)
• मातृभाषा
• डिजिटल साक्षरता का स्तर (ईमेल कर सकते है या नहीं)
• शैक्षणिक संस्थान में शिक्षा प्राप्त करने की स्थिति
• प्राप्त उच्चतम शैक्षणिक स्तर संकाय/विषय
• पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय काम किया
• आर्थिक गतिविधि की श्रेणी
• व्यवसाय
• उद्योग, व्यापार या सेवा की प्रकृति
• कर्मी का वर्ग
• गैर-आर्थिक गतिविधि
• काम की तलाश मे या काम के लिए उपलब्ध
• काम के स्थान तक यात्रा (कि०मी० और समय)
• जन्म स्थान
• पिछला निवास का स्थान यदि हो तो
• वर्तमान प्रवास का कारण
• प्रवास के समय से इस गाँव/ शहर मे रहने की अवधि
• स्थायी अवासीय पता
• वर्तमान में जीवित बच्चों का संख्या
• कभी जीवित जन्मे बच्चों की संख्या
• पिछले एक वर्ष के दौरान जीवित जन्मे बच्चों की संख्या।
• कोविड-19 टीकाकरण का स्थान
• बैंक खातों की कुल संख्या
• मोबाइल नंबर (अगर उपलब्ध है)
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• वोटर आईडी नंबर (अगर उपलब्ध है)
• पासपोर्ट नंबर (अगर उपलब्ध है)
• ड्राइविंग लाइसेंस (अगर उपलब्ध है)

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