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देश के 30 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य में उत्तराखंड बन सकता है रोल मॉडल, संभावनाएं मजबूत लेकिन चुनौतियां भी

Uk Fast Khabar August 24, 2026

भारत की तरक्की में उत्तराखंड की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण है. उत्तराखंड का साहसिक, धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है, धीरज सजवाण की रिपोर्ट

देहरादून: भारत को 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों की भूमिका अहम हो सकती है. राज्य की ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) में पिछले कुछ वर्षों में तेज बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन इसके साथ बढ़ता कर्ज, ब्याज का बोझ और पहाड़-मैदान के बीच असंतुलित विकास बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े हैं. ऐसे में पर्यटन, हाई एंड टूरिज्म, ग्रीन एनर्जी और नए आर्थिक क्षेत्रों के जरिए ग्रोथ बढ़ाने के साथ राज्य के लिए कर्ज और राजस्व के बीच संतुलन अहम विषय है.

पांच साल में 2.5 लाख करोड़ से 3.82 लाख करोड़ पहुंची GSDP: अर्थशास्त्री राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक, उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था फिलहाल करीब 7 फीसदी की सालाना दर से बढ़ रही है, जो राष्ट्रीय ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) की औसत वृद्धि दर के आसपास है. उन्होंने कहा कि, 2047 तक भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है, जब देश के सभी राज्य अपनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ाएं और जीएसडीपी में बेहतर प्रदर्शन करें. छोटे राज्यों के लिए इसमें खास अवसर हैं, क्योंकि इनकी आर्थिक आधार-रेखा अपेक्षाकृत छोटी होती है और इसलिए विकास की संभावनाएं बड़े राज्यों की तुलना में अधिक रहती हैं. बिष्ट के मुताबिक, उत्तराखंड समेत देश के छोटे राज्यों की तेज GSDP ग्रोथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विस्तार में निर्णायक योगदान दे सकती है.

राजेंद्र बिष्ट ने उत्तराखंड की आर्थिक प्रगति के आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि,

वर्ष 2021-22 में राज्य की GSDP करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए थी, जो 2025-26 में बढ़कर करीब 3.82 लाख करोड़ रुपए के आसपास पहुंच गई है. इसी तरह राज्य की प्रति व्यक्ति आय भी बढ़कर करीब 2.73 लाख रुपए सालाना के आसपास पहुंच गई है. यह आंकड़े बताते हैं कि राज्य की बढ़ती अर्थव्यवस्था का असर लोगों की आय पर भी दिखाई दे रहा है. हालांकि 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए मौजूदा ग्रोथ पर्याप्त नहीं होगी.
-राजेंद्र बिष्ट, अर्थशास्त्री-

अर्थशास्त्री का मानना है कि, उत्तराखंड को आने वाले वर्षों में अपनी सालाना GSDP ग्रोथ को करीब 11 से 12 फीसदी तक ले जाने का प्रयास करना होगा. हालांकि, ये मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं है. कुछ अवधियों में राज्य की ग्रोथ 8 से 10 फीसदी तक पहुंच चुकी है.

पर्यटन में हाई एंड सेगमेंट बनेगा ग्रोथ इंजन: उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका पहले से ही बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन अर्थशास्त्री राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक, अब केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बजाय ऐसे पर्यटकों पर फोकस करना होगा जो राज्य की अर्थव्यवस्था में अधिक खर्च करें.

तीर्थाटन में बड़ी संख्या में सामान्य आय वर्ग के श्रद्धालु आते हैं, जिन्हें सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है. लेकिन उनसे ज्यादा राजस्व की उम्मीद नहीं की जा सकती. ऐसे में हाई एंड टूरिज्म, राज्य की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाने वाला क्षेत्र बन सकता है. एडवेंचर टूरिज्म, हेली टूरिज्म और लग्जरी टूरिज्म में बड़ी संभावनाएं हैं. पिछले चार-पांच वर्षों में उत्तराखंड में फाइव स्टार होटल, हेली सेवाएं, एडवेंचर टूरिज्म और सड़क कनेक्टिविटी में विस्तार हुआ है, लेकिन इस क्षेत्र में अभी भी काफी गुंजाइश है.
राजेंद्र बिष्ट, अर्थशास्त्री

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, पर्यटन विभाग भी अब हाई एंड टूरिज्म सेगमेंट पर लगातार फोकस कर रहा है. उनका कहना है कि, बड़े और प्रतिष्ठित होटल ब्रांड के उत्तराखंड आने से प्रदेश में ऐसे पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है, जो ज्यादा खर्च करते हैं और राज्य के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. सचिव के मुताबिक,

पहले उत्तराखंड में फाइव स्टार सुविधाएं काफी सीमित थीं. लेकिन अब करीब एक दर्जन होटल में बड़े ब्रांड मौजूद हैं. ऋषिकेश में ताज होटल आने के बाद उसके आसपास पर्यटन आधारित पूरा इकोसिस्टम विकसित हुआ है. मसूरी में पहले जहां जेपी ब्रांड प्रमुख था, वहीं अब मैरियट जैसे बड़े ब्रांड भी स्थापित हो चुके हैं. कॉर्बेट, हरिद्वार और देहरादून में भी ताज जैसे बड़े ब्रांड आए हैं, जबकि कुमाऊं में नौकुचियाताल की तरफ भी अच्छे होटल ब्रांड पहुंच रहे हैं. इससे केवल होटल सेक्टर का राजस्व ही नहीं बढ़ रहा, बल्कि दूसरे निवेशकों का भरोसा भी उत्तराखंड में बढ़ रहा है.
-धीराज गर्ब्याल, सचिव, पर्यटन-

टिहरी झील को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी: पर्यटन सचिव के मुताबिक, टिहरी झील और उसके आसपास के क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है. इसके तहत करीब 100 गांवों को एक बड़े पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की योजना है. सरकार को उम्मीद है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे और उत्तराखंड के पर्यटन मॉडल को केवल चारधाम और पारंपरिक पर्यटन तक सीमित रखने के बजाय एक बड़े और विविध इकोसिस्टम में बदला जा सकेगा. इससे होटल, होम स्टे, परिवहन, स्थानीय उत्पाद, एडवेंचर एक्टिविटी और दूसरे सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिल सकता है.

ग्रीन एनर्जी में संभावनाएं, लेकिन इकोलॉजी का संतुलन जरूरी: अर्थशास्त्री राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के लिए दूसरा बड़ा आर्थिक अवसर ग्रीन एनर्जी में है. राज्य में हाइड्रोपावर की संभावनाओं पर पिछले कई दशकों से काम हुआ है, लेकिन हिमालयी पारिस्थितिकी को देखते हुए भविष्य की ऊर्जा रणनीति में संतुलन जरूरी है.

सोलर एनर्जी जैसे वैकल्पिक स्रोतों पर ज्यादा काम किया जाना चाहिए और इनके संसाधनों का विस्तार किया जाना चाहिए. उत्तराखंड यदि ग्रीन एनर्जी, पर्यटन और अन्य नए आर्थिक क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाता है तो राज्य के लिए राजस्व और रोजगार के नए स्रोत तैयार हो सकते हैं.
-राजेंद्र बिष्ट, अर्थशास्त्री-

बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ कर्ज सबसे बड़ी चुनौती: उत्तराखंड के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए वित्तीय संसाधन कहां से आएंगे? राजेंद्र बिष्ट के मुताबिक, राज्य ने पिछले चार वर्षों में अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम किया है, लेकिन लगातार बढ़ता कर्ज और उस पर लगने वाला ब्याज बड़ी चुनौती है. उनके मुताबिक,

पिछले वर्ष राज्य पर करीब 94 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था और इस पर करीब 8 हजार करोड़ रुपए के आसपास ब्याज का बोझ था. मौजूदा वित्तीय दबाव के बीच राज्य को कर्ज कम करने के साथ-साथ अपने आय के साधन भी बढ़ाने होंगे. यानी आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की आर्थिक रणनीति का फोकस केवल GSDP बढ़ाने पर नहीं, बल्कि ऐसी ग्रोथ पर होना चाहिए, जिससे सरकार के राजस्व में भी पर्याप्त बढ़ोत्तरी हो.
-राजेंद्र बिष्ट, अर्थशास्त्री-

पहाड़ और मैदान के बीच विकास का अंतर बड़ी चिंता: डेटा एनालिस्ट अनूप नौटियाल के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ने के साथ राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी, लेकिन उत्तराखंड के संदर्भ में विकास का असमान वितरण सबसे बड़ी चिंता है. उन्होंने कहा कि, राज्य के 25 वर्षों के आर्थिक सफर में GSDP और प्रति व्यक्ति आय दोनों बढ़े हैं, लेकिन आंकड़ों को करीब से देखने पर पहाड़ और मैदान के बीच विकास का अंतर साफ दिखाई देता है.

वर्तमान में उत्तराखंड की GSDP का करीब 70 फीसदी हिस्सा केवल चार मैदानी जिलों हरिद्वार, उधम सिंह नगर, देहरादून और नैनीताल से आता है, जबकि बाकी 9 पर्वतीय जिलों की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी के आसपास है. खासतौर पर चीन और नेपाल की सीमा से लगे सीमांत जिलों में आर्थिक गतिविधियों का स्तर अपेक्षाकृत कम है.

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को वास्तव में मजबूत बनाने के लिए ऐसा विकास मॉडल जरूरी है, जिसमें राज्य के हर हिस्से की भूमिका हो. यदि आर्थिक विकास कुछ मैदानी जिलों तक ही सीमित रहता है तो GSDP बढ़ने के बावजूद पलायन, रोजगार और क्षेत्रीय असमानता जैसी चुनौतियां बनी रहेंगी. ऐसे में 2047 के लक्ष्य को देखते हुए उत्तराखंड को पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यटन, बागवानी, स्थानीय उत्पाद, एडवेंचर टूरिज्म, ग्रीन एनर्जी और अन्य स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर नए ग्रोथ सेंटर विकसित करने होंगे.
-अनूप नौटियाल, डेटा एनालिस्ट-

2047 के लिए ग्रोथ के साथ वित्तीय अनुशासन जरूरी: उत्तराखंड के सामने आने वाले वर्षों में दोहरी चुनौती है. एक तरफ राज्य को भारत की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 11 से 12 फीसदी जैसी तेज आर्थिक वृद्धि हासिल करनी होगी, वहीं दूसरी तरफ बढ़ते कर्ज और ब्याज के बोझ को नियंत्रित करना होगा. इसके लिए पर्यटन में हाई वैल्यू कस्टमर, चारधाम के साथ एडवेंचर और लग्जरी टूरिज्म, हाइड्रो और सोलर आधारित ग्रीन एनर्जी, हॉर्टिकल्चर, फूड प्रोसेसिंग, आयुष, फार्मा, IT और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों को ग्रोथ इंजन बनाया जा सकता है. साथ ही सरकारी खर्च को ऐसे क्षेत्रों में केंद्रित करना होगा, जहां भविष्य में रोजगार और राजस्व पैदा हो.

कुल मिलाकर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में तेज बढ़ोतरी दिखाई है, लेकिन 2047 की बड़ी आर्थिक तस्वीर में राज्य की भूमिका केवल GSDP के आंकड़े बढ़ाने से तय नहीं होगी. असली चुनौती ऐसी टिकाऊ और संतुलित अर्थव्यवस्था तैयार करने की है, जिसमें निवेश और रोजगार बढ़े, पहाड़ और मैदान के बीच आर्थिक अंतर कम हो, सरकार के अपने राजस्व स्रोत मजबूत हों और विकास के लिए लिया गया कर्ज भविष्य की कमाई बढ़ाने वाला साबित हो. अगर उत्तराखंड इन मोर्चों पर संतुलन बना पाता है तो छोटा राज्य होने के बावजूद देश की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में उसकी भूमिका अपेक्षाकृत बड़ी हो सकती है.

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