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पहली बार इटली एक्सपोर्ट हुई उत्तराखंड की लीची, मेलोडी के बाद देहरादून का फल घोलेगा मिठास

Uk Fast Khabar June 19, 2026

उत्तराखंड के कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने इटली के लिए 1000 किलो लीची को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इटली की पीएम मेलानी को मेलोडी टॉफी देना खूब सुर्खियों में रहा. इस दौरान मेलोडी भी चर्चा में रही और उसका स्वाद भी. लेकिन इस बार इटली का स्वाद बदलने के लिए देहरादून की लीची इटली भेजी जा रही है. ये पहला मौका है जब देहरादून से इटली तक लीची सफर करेगी.

मेलोडी चॉकलेट के बाद अब इटली में भारत की लीची: कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी भेंट किए जाने की तस्वीरें देश-दुनिया में खूब चर्चा का विषय बनी थीं. सोशल मीडिया पर मेलोडी को लेकर मीम्स से लेकर राजनीतिक और सांस्कृतिक चर्चाओं का दौर चला था.

अब एक बार फिर भारत और इटली के बीच स्वाद का एक नया रिश्ता जुड़ने जा रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा किसी टॉफी की नहीं, बल्कि देहरादून की विश्व प्रसिद्ध लीची की है. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से पहली बार लीची का निर्यात इटली के लिए किया जा रहा है, जिसे राज्य के बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
उत्तराखंड से 1 हजार किलो लीची इटली एक्सपोर्ट की गई: देहरादून की लीची लंबे समय से अपनी खास मिठास, खुशबू और गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी भारी मांग रहती है, लेकिन सीमित शेल्फ लाइफ के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है. अब आधुनिक पैकेजिंग तकनीक और बेहतर कोल्ड चेन व्यवस्था के जरिए इस चुनौती को काफी हद तक पार कर लिया गया है. यही वजह है कि पहली बार करीब 1000 किलो लीची देहरादून से दिल्ली और वहां से इटली भेजी जा रही है.
नाजुक फल है लीची: लीची एक अत्यंत संवेदनशील फल है. पेड़ से तोड़े जाने के बाद इसकी गुणवत्ता तेजी से प्रभावित होने लगती है. सामान्य परिस्थितियों में लीची तीन दिन के भीतर ही खराब होने लगती है और उसके सड़ने का खतरा बढ़ जाता है. यही कारण है कि लंबे समय तक इसे दूसरे राज्यों या विदेशों तक पहुंचाना बेहद कठिन माना जाता रहा है. देहरादून की लीची अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में वह पहचान नहीं बना पाई, जिसकी वह हकदार थी.

आधुनिक तकनीक से की गई है लीची की पैकिंग: हालांकि इस बार स्थिति बदलती दिखाई दे रही है. कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) की मदद से लीची को सुरक्षित तरीके से विदेश भेजने की तैयारी की गई है.

इसके लिए ऐसी आधुनिक पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जो फल की ताजगी और गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम है. दावा किया जा रहा है कि नई तकनीक के जरिए लीची को 10 दिन या उससे अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निर्यात की संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं.

किसानों को बेहतर बाजार और कीमत मिलेगी: एपिडा के टेक्निकल एक्सपर्ट एनसी शाह का कहना है कि-

आधुनिक पैकेजिंग तकनीक के कारण लीची के निर्यात के नए रास्ते खुले हैं. लीची जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए अब तक इसे विदेशों तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी. लेकिन नई पैकेजिंग प्रणाली और तापमान नियंत्रण तकनीक के जरिए अब इसे अधिक समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इससे न केवल निर्यात आसान होगा, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.
-एनसी शाह, टेक्निकल एक्सपर्ट, एपिडा-

लीची के परिवहन के दौरान चाहिए 5 डिग्री तापमान: दरअसल लीची को सुरक्षित बनाए रखने के लिए पूरे परिवहन के दौरान लगभग 5 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखना आवश्यक होता है. तापमान में थोड़ी सी भी गड़बड़ी फल की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है. आधुनिक पैकेजिंग और कोल्ड चेन सिस्टम की मदद से इस तापमान को लगातार बनाए रखने में सफलता मिली है. इससे पहले इसी तकनीक का उपयोग करते हुए बिहार के मुजफ्फरपुर से दुबई और पंजाब के पठानकोट से कतर तक लीची भेजी जा चुकी है. लेकिन देहरादून से इटली तक लीची का निर्यात पहली बार किया जा रहा है, इसलिए इसे एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है.

देहरादून की आबोहवा लीची उत्पादन के लिए अच्छी है (ETV Bharat)

उत्तराखंड की बागवानी के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव: उद्यान विभाग भी इस उपलब्धि को राज्य की बागवानी क्षमता के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहा है. उद्यान विभाग के निदेशक आरके सिंह का कहना है कि-

विभाग लगातार उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने पर काम कर रहा है. लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी गुणवत्ता विकसित करना है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर सके. इसी दिशा में किए गए प्रयासों का परिणाम है कि आज देहरादून की लीची यूरोपीय बाजार तक पहुंचने जा रही है.
-आरके सिंह, निदेशक, उद्यान-

देहरादून की लीची की है ये खासियत: देहरादून की लीची को देश की सर्वश्रेष्ठ लीचियों में गिना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक खुशबू और संतुलित मिठास है. दून घाटी की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियां इसे एक विशिष्ट स्वाद प्रदान करती हैं. यही वजह है कि बाजार में देहरादून की लीची की मांग हमेशा बनी रहती है.

भविष्य में यूरोप और अन्य देशों को भी भेजी जा सकती है देहरादून की लीची: हालांकि वर्षों से इसकी लोकप्रियता के बावजूद उत्पादन, प्रसंस्करण और निर्यात के क्षेत्र में अपेक्षित स्तर पर काम नहीं हो पाया था. अब राज्य सरकार और उद्यान विभाग इस दिशा में नए प्रयास कर रहे हैं. यदि इटली को भेजी जा रही यह खेप सफल रहती है, तो भविष्य में यूरोप समेत अन्य देशों के बाजार भी देहरादून की लीची के लिए खुल सकते हैं. इससे न केवल राज्य के किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि उत्तराखंड की बागवानी अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.

कृषि मंत्री ने इटली के लिए लीची को दिखाई हरी झंडी: इस पूरी पहल को औपचारिक रूप से कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इटली भेजी गई 1000 किलो लीची उद्यान विभाग के बगीचे में उत्पादित हुई है. इसकी उच्च गुणवत्ता और निर्यात मानकों पर खरा उतरने की क्षमता को देखते हुए इसे इस विशेष खेप के लिए चुना गया. मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि-

ये उत्तराखंड के किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण है. राज्य सरकार के द्वारा कृषि और उद्यान उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
-गणेश जोशी, कृषि एवं उद्यान मंत्री–

लीची उत्तराखंड को दिला सकती है अंतरराष्ट्रीय पहचान: जिस तरह कुछ समय पहले प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच मेलोडी टॉफी चर्चा का विषय बनी थी, उसी तरह अब देहरादून की लीची भारत और इटली के बीच स्वाद का नया सेतु बनने जा रही है. यह सिर्फ एक फल का निर्यात नहीं, बल्कि उत्तराखंड की कृषि क्षमता, आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने की महत्वाकांक्षा का प्रतीक भी है. यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में देहरादून की लीची दुनिया के कई देशों तक पहुंच सकती है और उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय फल निर्यात के नक्शे पर नई पहचान दिला सकती है.

 

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