प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों के लिए अंब्रेला एक्ट की कवायद एक बार फिर शुरू की जा रही है। विधानसभा से दूसरी बार पारित हो चुके राज्य विश्वविद्यालय विधेयक को राजभवन की स्वीकृति नहीं मिली। अब इस विधेयक को नए सिरे से विधानसभा में पारित कराने की तैयारी है। इस संबंध में कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाएगा।
उत्तराखंड प्रदेश बने हुए 22 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन राजकीय विश्वविद्यालयों के लिए बहुप्रतीक्षित अंब्रेला एक्ट का सपना पूरा नहीं हो पाया है। वर्ष 2020 के बाद से प्रदेश सरकार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक को दो बार विधानसभा से पारित कर राजभवन भेज चुकी है।
कुलपति की नियुक्ति को लेकर गतिरोध
राजभवन इस विधेयक को लौटाया तो सरकार ने आंशिक संशोधन के साथ इसे पारित कर दोबारा राजभवन भिजवा दिया था। इस विधेयक में राजकीय विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति को लेकर राजभवन के अधिकारों को लेकर गतिरोध बना हुआ था। राजभवन और शासन के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता भी हुई, लेकिन यह गतिरोध दूर नहीं हो सका।
प्रदेश के सहायता प्राप्त अशासकीय डिग्री कॉलेजों को भी विधेयक के कुछ प्रविधानों पर आपत्ति थी। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, विधेयक को लेकर राजभवन की आपत्ति और संदेश को देखते हुए अब नए सिरे से इसे विधेयक को लाने की तैयारी है। राज्य विश्वविद्यालय विधेयक के प्रारूप पर कैबिनेट की मुहर शीघ्र लग सकती है। उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने राज्य विश्वविद्यालय विधेयक पर नए सिरे से विचार करने की पुष्टि की।

