केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रियों को लेकर गौरीकुंड से केदारनाथ जाने वाले घोड़े-खच्चरों पर जीपीएस चिप लगेगी, ताकि हर यात्री व घोड़े की सही लोकेशन का पता चल सके। प्रशासन के निर्देश पर अब तक 2100 घोड़े और खच्चरों पर जीपीएस चिप लगा दी गई है।
घोड़े-खच्चर के माथे पर जीपीएस चिप:
इस बार केदारनाथ की यात्रा पर चलने वाले हर घोड़े-खच्चर के माथे पर जीपीएस चिप लगाई जाएगी। इस चिप को लगाने का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा है। केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़े और खच्चरों से जाने वाले प्रत्येक यात्री की लोकेशन प्रशासन के पास रहेगी। केदारनाथ पैदल मार्ग आपदा की दृष्टि से काफी संवेदनशील है।
सुरक्षा की दृष्टि से यह जीपीएस चिप महत्वपूर्ण:
पैदल मार्ग पर दुर्घटनाएं घटित होती रहती हैं। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से यह जीपीएस चिप महत्वपूर्ण रहेगी। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश पंवार ने बताया कि जितने भी घोड़े और खच्चरों का यात्रा मार्ग में पंजीकरण होगा, सभी पर यह चिप लगाई जाएगी।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर 14 चिकित्सा राहत केंद्रों में कार्मिक तैनात:
केदारनाथ यात्रा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने केदारनाथ पैदल मार्ग पर 14 चिकित्सा राहत केंद्रों (एमआरपी) में स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती कर दी है। मुख्य चिकित्साधिकारी बीके शुक्ला ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने केदारनाथ यात्रा के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
चारधाम यात्रा व्यवस्था में तालमेल से काम करें विभाग: गुरमीत सिंह
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि चारधाम यात्रा की व्यवस्था के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करना होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखा जाए। उन्होंने यात्रा के माध्यम से स्थानीय उत्पादों, विशेषकर महिला समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने राजभवन में चारधाम यात्रा की तैयारियों के संबंध में शासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा उत्तराखंड की सामाजिक, सांस्कृतिक व्यवस्था की पहचान है। स्थानीय नागरिक इस यात्रा का अभिन्न अंग हैं। उनकी भागीदारी के बिना यात्रा संभव नहीं है। होटल, परिवहन और छोटी दुकान चलाने वाले इस यात्रा के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। सभी की सुविधाओं का पूर्ण ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान तकनीक का प्रयोग करते हुए मूल्य वद्र्धन करें।
राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल एप, ड्रोन व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक के माध्यम से यात्रियों को सुविधाएं दी जाएं। अंग्रेजी शब्द टूरिज्म में तीन अक्षर ओयूआर में अवर (हमारा) शब्द छिपा है। इस पर ध्यान दिया जाए। यात्रा व्यवस्था सिर्फ सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक ड्यूटी नहीं है। इसमें पूर्ण समर्पण की भावना के साथ कार्य करना होगा। यात्रा के दौरान आपदा प्रबंधन मशीनरी को तैयार रखा जाए। आपदा में पुलिस सहित फस्र्ट रिस्पांडर की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्हें अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
वाहन फिटनेस को 19 स्थानों पर यात्रा सेल:
बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह राधा रतूड़ी और पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। ट्रैफिक मैनेजमेंट के 133 स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात की गई है। परिवहन सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने बताया कि यात्रा के लिए 1808 बस चिह्नित की गई हैं।
साथ ही 500 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जा रही है। 19 स्थानों पर गाडिय़ों की फिटनेस और कागजों की जांच के लिए यात्रा सेल गठित की गई है। अभी तक 1586 ग्रीन कार्ड जारी हो चुके हैं। आनलाइन पोर्टल पर 166 ट्रिप कार्ड जारी किए गए हैं।
यात्रा मार्गों पर 100 वाटर एटीएम:
चिकित्सा सचिव राधिका झा ने बताया कि यात्रा मार्गों पर चिकित्सकों की तैनाती रोटेशन के आधार पर की जा रही है। कार्डियोलाजिस्ट की समस्या के समाधान के रूप में 35 चिकित्सकों को हृदय रोगियों के प्राथमिक उपचार के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। यात्रा अवधि में टेलीमेडिसिन सेवाएं भी ली जाएंगी।
पेयजल सचिव नितेश झा ने बताया कि यात्रा मार्गों पर इस बार 100 वाटर एटीएम स्थापित किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। आपदा प्रबंधन सचिव डा रंजीत सिन्हा ने बताया कि यात्रा मार्गों पर तहसील आपदा प्रबंधन केंद्र सक्रिय हैं। स्थानीय नागरिकों को आपदा मित्र का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पेट्रोल पंपों व गैस एजेंसियों में रिजर्व स्टाक:
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सचिव बीएस मनराल ने बताया कि यात्रा मार्गों पर खाद्य एवं आवश्यक पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। 78 पेट्रोप पंपों और 66 गैस एजेंसियों में रिजर्व स्टाक का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
जीएमवीएन की प्रबंध निदेशक स्वाती एस भदौरिया ने बताया कि अभी तक यात्रा को आनलाइन बुकिंग के माध्यम से 10.5 करोड़ की राशि प्राप्त हो चुकी है। सभी यात्री विश्राम गृहों को गूगल मैप पर पिन किया जा चुका है। 26 अप्रैल से जीएमवीएन कंट्रोल रूम 24 घंटे कार्यरत हो गया है।
अन्य विभागों से जोड़ रहे पर्यटन की वेबसाइट:
पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन एंड टूरिस्ट केयर वेब पोर्टल संचालित किया जा रहा है। श्रद्धालु मोबाइल एप व वेब पोर्टल या भौतिक रूप से स्थापित कियोस्क के माध्यम से अपना पंजीकरण करा यात्रा शुरू कर सकते हैं। पर्यटन की वेबसाइट को अन्य विभागों की सेवाओं के साथ जोडऩे का कार्य चल रहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव आनंद बद्र्धन, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, महानिदेशक सूचना रणवीर सिंह चौहान समेत कई आला अधिकारी उपस्थित थे।


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