Skip to content
UK Fast Khabar

UK Fast Khabar

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

Categories

  • Biography
  • BJP
  • blog
  • Business
  • Dehardun
  • Economy
  • employment
  • Model
  • National
  • New tehri
  • News
  • Newsbeat
  • Politics
  • Stories
  • Tech
  • Uncategorized
  • World
  • अपराध
  • आपका शहर
  • इतिहास
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • ऊधम सिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • क्राइम
  • खबर हटकर
  • खेल
  • चमोली
  • चम्पावत
  • चलो चले देवभूमि
  • चारधाम
  • चारधाम यात्रा
  • टिहरी
  • टेक्नॉलॉजी
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देश-विदेश
  • देहरादून
  • देहरादून/मसूरी
  • धर्म-संस्कृति
  • धामी सरकार
  • नई दिल्ली
  • नैनीताल
  • न्यूज़
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पुलिस
  • बाजार
  • बिहार
  • भारत
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • रुड़की
  • रुद्रपुर
  • रुद्रप्रयाग
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • विदेश
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • शिक्षा/रोजगार
  • सेना
  • सोशल मीडिया वायरल
  • स्वास्थ्य
  • हरिद्वार
  • हल्द्वानी
Primary Menu
  • Home
  • उत्तराखंड
  • देहरादून/मसूरी
  • भारत
  • विदेश
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • सोशल मीडिया वायरल
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • खेल
  • News
Live

उत्तराखंड में चमत्कारी जड़ी की खोज में निकले हजारों लोग, ₹20 लाख प्रति किलो बिकती है ‘हिमालयन वियाग्रा’

Uk Fast Khabar June 4, 2026

15 हजार से ज्यादा लोग कीड़ा जड़ी की तलाश में छान रहे बुग्याल, पिथौरागढ़ के कई घरों में दिख रहे सिर्फ बच्चे और बुजुर्ग

पिथौरागढ़: उत्तराखंड का हिमालयी क्षेत्र अद्भुत चीजों का भंडार है. यहां चमत्कारी जड़ी-बूटियां बहुतायत में मिलती हैं. ऐसी ही एक जड़ी है ‘कीड़ा जड़ी’ या ‘यारसा गुंबा’. कीड़ा जड़ी को हिमालयन वियाग्रा भी कहते हैं. ये हिमालय के बर्फ वाले चरागाहों जिन्हें स्थानीय भाषा में बुग्याल कहते हैं में पाई जाती है. जैसे जैसे बर्फ पिघलने लगती है, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोग कीड़ा जड़ी की खोज में निकल जाते हैं. यह हिमालय के 3000 मीटर से ऊपर के हिस्सों में पाई जाती है. कीड़ा जड़ी तब बनती है, जब कैटरपिलर एक घास खाता है.

बर्फ पिघलने के साथ ही कीड़ा जड़ी की तलाश शुरू: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों धारचूला और मुनस्यारी में कीड़ा जड़ी पाई जाती है. एक महीने पहले तक मुनस्यारी और धारचूला के ऊंचाई वाले बुग्याल बर्फ की मोटी चादर से ढके हुए थे. अप्रैल और मई में हुई बर्फबारी के कारण यारसा गुंबा (Yarsagumba) यानी कीड़ा जड़ी का सीजन तय समय पर शुरू नहीं हो पाया था. अब बर्फ पिघलने के बाद हालात बदल गए हैं.

  • उच्च हिमालय की ओर रवाना हुए हजारों ग्रामीण: सीमांत क्षेत्र के हजारों ग्रामीण घर छोड़कर उच्च हिमालयी बुग्यालों की ओर रवाना हो चुके हैं. मुनस्यारी, धारचूला और बंगापानी तहसील से 15 हजार से अधिक महिला-पुरुष इन दिनों यारसा गुंबा की तलाश में बुग्यालों में डेरा डाले हुए हैं. इसके चलते अधिकांश गांवों में केवल बुजुर्ग और छोटे बच्चे ही रह गए हैं. कई गांवों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है, क्योंकि परिवार के ज्यादातर सदस्य ऊंचाई वाले चारागाहों में पहुंच चुके हैं.

    ग्रामीणों की साल भर की कमाई का जरिया है कीड़ा जड़ी: ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ एक मौसमी गतिविधि नहीं, बल्कि सालभर की कमाई का बड़ा जरिया भी है. यही वजह है कि मौसम साफ होते ही लोग टेंट, राशन, गर्म कपड़े और जरूरी सामान के साथ बुग्यालों की ओर निकल पड़े हैं. हालांकि वैज्ञानिक लगातार बढ़ते दोहन और बदलते मौसम के कारण यारसा गुंबा के भविष्य को लेकर चिंता भी जता रहे हैं.

    ऐसी बनती है कीड़ा जड़ी या यारसा गुंबा: यारसा गुंबा एक तरह के कीड़े का लार्वा होता है. कीड़ा जड़ी या यारसा गुंबा (Yarsagumba) को अंग्रेजी में कैटरपिलर फंगस (Caterpillar Fungus) या कॉर्डिसेप्स (Cordyceps) कहा जाता है. सर्दी के मौसम में, जब लार्वा जमीन के अंदर रहते हैं, तब एक खास किस्म की फफूंद (Ophiocordyceps Sinensis) इनके शरीर में प्रवेश कर जाती है. इसके बाद फफूंद उसके सिर वाले हिस्से से एक पौधे के अंकुर की तरह बाहर निकलती है. कीड़ा जड़ी बर्फ से ढकी रहती है. मई-जून माह में जब बर्फ पिघलती है, तो इसे निकाला जाता है. नीचे कीड़ा (लार्वा) और सिर पर फफूंद के घास जैसा नजर आने से इसे पिथौरागढ़ और नेपाल में कीड़ा जड़ी कहा जाता है.

    इंटरनेशनल मार्केट में 20 लाख रुपए किलो तक बिकती है कीड़ा जड़ी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता के आधार पर लगभग ₹10 लाख से ₹20 लाख प्रति किलो तक होती है. पिथौरागढ़ में इस समय कीड़ा जड़ी की कीमत 15 लाख रुपए प्रति किलो तक है. कीड़ा जड़ी का उपयोग भारत में बेहद कम होता है. यह बेशकीमती कीड़ा जड़ी नेपाल के रास्ते चीन की मंडी तक पहुंचती है. चीन में इससे टॉनिक और दवाइयां बनाई जाती हैं.

    पिथौरागढ़ जिले के इन हिमालयी इलाकों में मिलती है कीड़ा जड़ी: पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी के रालम, राजरंभा, नागनीधुरा और नामिक क्षेत्र के अलावा धारचूला और बंगापानी के छिपलाकेदार, सुमढुंग, दारमा घाटी के सौन, नागलिंग, बालिंग, फिलम तथा व्यास घाटी के नज्यांग धुरा क्षेत्र यारसा गुंबा के प्रमुख जोन माने जाते हैं. इन्हीं इलाकों में ग्रामीण अस्थायी शिविर लगाकर रहते हैं. पिथौरागढ़ के अलावा बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील तथा चमोली और उत्तरकाशी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी यारसा गुंबा पाया जाता है.

    कीड़ा जड़ी की तलाश में दो महीने बुग्यालों में होता है प्रवास: मुनस्यारी के युवा देवेन्द्र सिंह बताते हैं कि-

    जिन वन पंचायत क्षेत्रों में यारसा गुंबा मिलता है, वहां के ग्रामीण हर साल सामूहिक रूप से बुग्यालों में जाते हैं. एक-दो दिन नहीं बल्कि करीब डेढ़ से दो महीने तक वहीं रहना पड़ता है. इसलिए लोग अपने साथ टेंट, राशन, बर्तन, गर्म कपड़े और अन्य जरूरी सामान लेकर जाते हैं. उनके रवाना होने के बाद गांवों में सिर्फ बुजुर्ग और बच्चे ही रहते हैं.
    -देवेंद्र सिंह, स्थानीय निवासी, मुनस्यारी-

    कीड़ा जड़ी को पहचानने के लिए अनुभव चाहिए: यारसा गुंबा को पहचानना सबसे कठिन काम होता है. बर्फ पिघलने के बाद इसका केवल बेहद पतला हिस्सा जमीन से बाहर दिखाई देता है. इसे देखने के लिए घंटों झुककर घास और मिट्टी को बारीकी से खंगालना पड़ता है. दिखाई देने पर इसे नुकीले औजार से सावधानीपूर्वक निकाला जाता है. क्योंकि टूटने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है.

    बदलते मौसम चक्र से परिवर्तित हुआ यारसा गुंबा का सीजन: स्थानीय लोगों का कहना है कि एक दशक पहले तक नवंबर से फरवरी के बीच अच्छी बर्फबारी होती थी और मार्च से बर्फ पिघलने लगती थी. लेकिन हाल के वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदला है. अब अप्रैल और मई तक हिमपात देखने को मिल रहा है. इस बार भी मई की शुरुआत तक कई बुग्याल बर्फ से ढके रहे. इस कारण यारसा गुंबा सीजन समय पर शुरू नहीं हो पाया. जून में जाकर बड़े पैमाने पर दोहन शुरू हुआ है.

    कीड़ा जड़ी का उत्पादन घटने से विशेषज्ञ चिंतित: यारसा गुंबा पर शोध करने वाले प्रोफेसर सीएस नेगी का कहना है कि-

    पिछले दो दशकों में लगातार दोहन के कारण कई क्षेत्रों में इसका उत्पादन घटा है. तितली के अंडों और प्राकृतिक चक्र को विकसित होने का समय मिलना चाहिए. इसके लिए कुछ क्षेत्रों में अंतराल देकर दोहन की व्यवस्था जरूरी है. उच्च हिमालयी बुग्यालों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों का असर केवल यारसा गुंबा पर ही नहीं बल्कि पूरी जैव विविधता पर पड़ सकता है.
    -प्रोफेसर सीएस नेगी, यारसा गुंबा पर शोध करने वाले वैज्ञानिक-

    हालांकि प्रोफेसर सीएस नेगी मानते हैं कि यारसा गुंबा कई परिवारों का भरण पोषण करने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत करती है.

    चमत्कारी औषधि है कीड़ा जड़ी: कीड़ा जड़ी यानी यारसा गुंबा को चमत्कारी औषधि माना जाता है. इसे थकान दूर करने, किडनी की बीमारी और यौन शक्ति बढ़ाने में उपयोग किया जाता है. इसकी सबसे अधिक डिमांड चीन में है.

    चीन की महिला धावकों ने लगाए थे मेडल के ढेर: 1993 में जर्मनी के स्टटगार्ट में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में चीन की महिला एथलीटों ने कुल 8 पदक (4 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य) जीते थे. चीन की महिला धावकों ने कई पुराने वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ डाले थे. इससे खेल जगत में तहलका मच गया. सभी लोग अचंभित थे कि अचानक चीन की एथलीटों का प्रदर्शन इतना ऊपर कैसे पहुंच गया.

    कीड़ा जड़ी निकली रिकॉर्डतोड़ सफलता का राज: जब हर तरफ से सवाल होने लगे तो चीनी टीम के कोच मा जुनरेन (Ma Junren) ने खुले तौर पर माना था कि उनकी महिला एथलीटों की इस अभूतपूर्व सफलता और अतिरिक्त ऊर्जा का राज ‘कॉर्डिसेप्स’ यानी यारसा गुंबा और कछुए के खून का विशेष सप्लीमेंट था.

    कीड़ा जड़ी निकालने की नीति: उत्तराखंड में कीड़ा जड़ी को लेकर एक नीति बनी है. इसके अनुसार कीड़ा जड़ी दोहन के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होता है. संबंधित जिलों के डीएफओ कीड़ा जड़ी ढूंढने के अनुमति प्रदान करते हैं. कीड़ा जड़ी केवल स्थानीय निवासियों या वन पंचायत के सदस्यों को परमिट के आधार पर निकालने की अनुमति मिलती है.

    पंजीकरण और रॉयल्टी: संग्रहकर्ताओं और व्यापारियों को उत्तराखंड वन विकास निगम या संबंधित वन पंचायत के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य है. इकट्ठा की गई कीड़ा जड़ी पर नियमानुसार रॉयल्टी जमा करनी होती है. बुग्यालों (उच्च हिमालयी घास के मैदानों) को नुकसान से बचाने के लिए रोटेशन के आधार पर कीड़ा जड़ी निकालने की अनुमति दी जाती है.

    यारसा गुंबा दोहन के लिए स्थानीय स्तर वन पंचायतों के द्वारा निर्धारित शुल्क जमा कराया जाता है. वन विभाग के द्वारा प्रभागीय वनाधिकारी पिथौरागढ़ के माध्यम से विज्ञप्ति जारी कर ठेकेदारों को लाइसेंस दिया जाता है. ठेकेदार फिर ग्रामीण द्वारा निकाले हुए यारसा गम्बू को खरीदते हैं.

    तस्करी रोकने के लिए कदम: कीड़ा जड़ी के अनियंत्रित दोहन और अवैध बिक्री रोकने के लिए सरकार लगातार सेटेलाइट मैपिंग और परमिट नियमों की सख्ती का सहारा ले रही है.

Continue Reading

Previous: बिहार के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे
Next: आज उत्तराखंड पहुंचेंगे राहुल गांधी, अल्मोड़ा में रैली से होगा चुनावी शंखनाद

Related Stories

धामी सरकार में इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले, कई पार्टी नेताओं को सौंपा दायित्व, पढ़ें पूरी खबर

धामी सरकार में इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले, कई पार्टी नेताओं को सौंपा दायित्व, पढ़ें पूरी खबर

June 4, 2026
आज उत्तराखंड पहुंचेंगे राहुल गांधी, अल्मोड़ा में रैली से होगा चुनावी शंखनाद

आज उत्तराखंड पहुंचेंगे राहुल गांधी, अल्मोड़ा में रैली से होगा चुनावी शंखनाद

June 4, 2026
बिहार के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे

बिहार के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे

June 4, 2026
https://youtu.be/mr6MrumB0_k

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

You may have missed

धामी सरकार में इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले, कई पार्टी नेताओं को सौंपा दायित्व, पढ़ें पूरी खबर

धामी सरकार में इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले, कई पार्टी नेताओं को सौंपा दायित्व, पढ़ें पूरी खबर

June 4, 2026
आज उत्तराखंड पहुंचेंगे राहुल गांधी, अल्मोड़ा में रैली से होगा चुनावी शंखनाद

आज उत्तराखंड पहुंचेंगे राहुल गांधी, अल्मोड़ा में रैली से होगा चुनावी शंखनाद

June 4, 2026
उत्तराखंड में चमत्कारी जड़ी की खोज में निकले हजारों लोग, ₹20 लाख प्रति किलो बिकती है ‘हिमालयन वियाग्रा’

उत्तराखंड में चमत्कारी जड़ी की खोज में निकले हजारों लोग, ₹20 लाख प्रति किलो बिकती है ‘हिमालयन वियाग्रा’

June 4, 2026
बिहार के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे

बिहार के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे

June 4, 2026

About Us

Founder – INDRA
Website – www.ukfastkhabar.com
Email – ukfastkhabar@gmail.com
Phone – +91-9917070725
Address –Naithani House, Lane No. 4 Devpuram Enclave, Badripur, Dehradun, 208005, Uk

Categories

BJP blog Dehardun Economy National News Politics Tech World अपराध आपका शहर उत्तराखंड ऋषिकेश क्राइम खबर हटकर खेल चलो चले देवभूमि चारधाम चारधाम यात्रा टेक्नॉलॉजी ट्रेंडिंग खबरें ताज़ा ख़बरें दुर्घटना देश-विदेश देहरादून देहरादून/मसूरी धर्म-संस्कृति धामी सरकार नैनीताल न्यूज़ पर्यटन पुलिस बाजार भारत मनोरंजन मौसम राजधानी दिल्ली राजनीति रुद्रपुर विदेश व्यापार शिक्षा सोशल मीडिया वायरल स्वास्थ्य हरिद्वार

Recent Posts

  • धामी सरकार में इन नेताओं की हुई बल्ले बल्ले, कई पार्टी नेताओं को सौंपा दायित्व, पढ़ें पूरी खबर
  • आज उत्तराखंड पहुंचेंगे राहुल गांधी, अल्मोड़ा में रैली से होगा चुनावी शंखनाद
  • उत्तराखंड में चमत्कारी जड़ी की खोज में निकले हजारों लोग, ₹20 लाख प्रति किलो बिकती है ‘हिमालयन वियाग्रा’
  • बिहार के प्राइवेट हॉस्पिटल के ICU में लगी भीषण आग, कई मरीजों की मौत, 20 से ज्यादा झुलसे
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Copyright ©Uk Fast Khabar 2023, Design & Develop by Manish Naithani (9084358715). All rights reserved. | MoreNews by AF themes.