Skip to content

UK Fast Khabar

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

Categories

  • Biography
  • BJP
  • blog
  • Business
  • CONGRESS
  • crime
  • Dehardun
  • Economy
  • employment
  • Model
  • Naitional
  • National
  • New tehri
  • News
  • Newsbeat
  • Politics
  • Stories
  • Tech
  • Uncategorized
  • World
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अपराध
  • अल्मोड़ा
  • आपका शहर
  • आपदा
  • इतिहास
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तरकाशी
  • उत्तरराखंड विधानसभा
  • उत्तराखंड
  • उत्तराखण्ड
  • ऊधम सिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • केदारनाथ
  • क्राइम
  • खबर हटकर
  • खेल
  • गैरसैण
  • चमोली
  • चम्पावत
  • चलो चले देवभूमि
  • चारधाम
  • चारधाम यात्रा
  • जम्मू-कश्मीर
  • जोशीमठ
  • टिहरी
  • टेक्नॉलॉजी
  • टेक्नोलॉजी
  • ट्रेंडिंग खबरें
  • ताज़ा ख़बर
  • ताज़ा ख़बरें
  • दिल्ली
  • दुर्घटना
  • देश
  • देश-विदेश
  • देहरादून
  • देहरादून/मसूरी
  • धर्म-संस्कृति
  • धामी सरकार
  • नई दिल्ली
  • नैनीताल
  • न्यूज़
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पुलिस
  • बाजार
  • बिहार
  • भारत
  • मनोरंजन
  • मसूरी
  • मुंबई
  • मौसम
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • रुड़की
  • रुद्रपुर
  • रुद्रप्रयाग
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • विदेश
  • व्यापार
  • शिक्षा
  • शिक्षा/रोजगार
  • श्रीनगर
  • सेना
  • सोशल मीडिया वायरल
  • स्वास्थ्य
  • हरिद्वार
  • हल्द्वानी
Primary Menu
  • Home
  • उत्तराखंड
  • देहरादून/मसूरी
  • भारत
  • विदेश
  • राजधानी दिल्ली
  • राजनीति
  • सोशल मीडिया वायरल
  • शिक्षा
  • स्वास्थ्य
  • खेल
  • News
Live

रेडॉन गैस के बदलाव से क्या भूकंप का पता लग सकता है? 2013 केदारनाथ आपदा के भी मिले चौंकाने वाले फैक्ट्स

Uk Fast Khabar July 9, 2026

रेडॉन गैस से क्या भूकंप की भविष्यवाणी की जा रही है, इस पर वाडिया इंस्टीट्यूट ने बड़ी स्टडी की है. रिपोर्ट- रोहित कुमार सोनी.

देहरादून: वैसे तो दुनिया में फिलहाल कोई ऐसा सिस्टम नहीं है जिससे भूकंप को लेकर भविष्यवाणी की जा सके. फिर भी कुछ तरीके हैं, जिनके आधार पर काफी हद तक भूकंप के बारे में समय से पहले पता किया जा सकता है. इसमें से एक है रेडॉन गैस. वैज्ञानिकों का मानना है कि किसी क्षेत्र में रेडॉन गैस के बढ़ने या घटना से भूकंप का पता लगाया जा सकता हैं. इसलिए आज कल किसी क्षेत्र में भूकंप के खतरे को भापने के लिए रेडॉन गैस पर ज्यादा ध्यान दिया जाता हैं.

इस पर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी ने भी रिसर्च की है. वाडिया इंस्टीट्यूट की स्टडी थोड़ी अलग है, जिसमें 2013 की केदारनाथ आपदा का भी ज्रिक है. वाडिया इंस्टीट्यूट की स्टडी क्या कहती है, और वहां से वैज्ञानिकों के क्या दावे हैं, इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

रेडॉन एक रंगहीन, गंधहीन रेडियोधर्मी गैस है, जो मिट्टी और चट्टानों में यूरेनियम के टूटने से प्राकृतिक रूप से बनती है.

फिलहाल वैज्ञानिक किसी भी स्थान, समय और तीव्रता वाले भूकंप की कोई सटीक भविष्यवाणी करने में सक्षम नहीं है. वैसे दुनिया भर के वैज्ञानिक इस प्रयास में लगे हुए हैं कि कोई ऐसा तंत्र (सिस्टम) विकसित किया जाए, जिससे भूकंप के पूर्वनुमान का अंदाजा लग सके और बड़े जान-माल का नुकसान होने से बचाया जा सके, लेकिन वैज्ञानिकों को अभी तक इसमें कोई सफलता नहीं मिल पाई है.

वैज्ञानिकों की चुनौती: वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूगर्भ में करीब 100 किलोमीटर नीचे क्या हलचल हो रही है और वहां कितनी एनर्जी इकट्ठा हो रही है, इसका पता लगाना है. यही वजह है कि किस जगह पर, कब और कितने मेग्नीट्यूड का भूकंप आएगा, इसके पूर्वानुमान को लेकर वैज्ञानिकों को कोई सफलता नहीं मिली है.

रेडॉन गैस पर स्टडी: इसके अलावा कई बार ऐसा देखा गया है कि जिस क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस हुए हैं, उससे पहले उस क्षेत्र में रेडॉन गैस की मात्रा में बड़ा बदलाव आता है. जिसके चलते भूकंप को रेडॉन गैस जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इसको लेकर अभी कोई ठोस अध्ययन नहीं हुआ है, लेकिन वैज्ञानिक पूर्व में हुई तमाम घटनाओं को देखते हुए यह संभावना जाता चुके हैं कि भूकंप से पहले रेडॉन गैस की मात्रा उस क्षेत्र में कभी बढ़ जाती है तो कभी घट जाती है. हालांकि, इस पर अभी भी वैश्विक स्तर पर अध्ययन किया जाना बाकी है.

स्टडी में इस बात का पता चला है कि रेडॉन के असामान्य स्तर और भूकंप के बीच कोरिलेशन देखा गया है, लेकिन वैज्ञानिक अभी तक केवल इस डेटा के आधार पर सटीक समय, स्थान और तीव्रता की भविष्यवाणी करने में सक्षम नहीं हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि रेडॉन के स्तर में बदलाव भूकंप के अलावा स्थानीय भूविज्ञान और मौसम संबंधी कारकों (जैसे तापमान, दबाव और वर्षा) से भी प्रभावित होता है.

वाडिया के वैज्ञानिकों का स्टडी: वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून ने रेडॉन गैस के रिसाव को लेकर अध्ययन किया है, जिसमें कुछ अलग तथ्य निकलकर सामने आए है. वाडिया की स्टडी में चौकान वाला तथ्य यह है कि धरती में रेडॉन गैस में बढ़ना या घटना सिर्फ भूकंप के दौरान ही देखने को नहीं मिला, बल्कि साल 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के दौरान भी उस क्षेत्र में रेडॉन गैस की मात्रा काफी अधिक बढ़ गई थी.

दरअसल, वाडिया इंस्टीट्यूट के भू वैज्ञानिक डॉ नरेश कुमार की ओर से किए गए अध्ययन Assessment of Hydrological Impact on Radon Data of MPGO, Ghuttu, During Kedarnath Flash Flood in Garhwal Himalaya, Implications for Earthquake Precursor रिपोर्ट पिछले महीने Geophysics for Advancing Seismology में पब्लिश हुई है.

2013 केदारनाथ आपदा के दौरान रेडॉन गैस का डाटा: भू वैज्ञानिक डॉ नरेश कुमार के अनुसार, केदारनाथ के पास गुत्तू रीजन में कुछ विशेष सेंसर और मॉनिटरिंग उपकरण लगाए गए हैं, वहीं से उन्हें रेडॉन गैस का डाटा मिला है, जिससे यह पता चला है कि साल 2013 में आई भीषण आपदा के दौरान उस क्षेत्र में रेडॉन गैस की औसत मात्रा स्टैंडर्ड डेविएशन के दोगुने की सीमा को पार कर गई थी. ये डाटा केदारनाथ में 16-17 जून 2013 को आई आपदा से जुड़ा हुआ है.

केदारनाथ क्षेत्र में 52 घंटे तक लगातार बारिश हुई थी: केदारनाथ आपदा के दौरान वहां मिले रिकार्ड जैसे पानी की ऊंचाई और रेडॉन गैस के स्तर असामान्य रूप से बदल गए थे. दरअसल, केदारनाथ क्षेत्र में 15 से 17 जून 2013 के बीच करीब 52 घंटे तक लगातार भारी बारिश हुई थी.

Geophysical Parameters पर पड़ा असर: लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सतह पर जमा पानी बड़े पैमाने पर बढ़ गया और वो तेज बहाव (फ्लैश फ्लड) में बदल गया, जिसके चलते गुत्तू में स्थित एक 68 मीटर गहरे बोरहोल में बारिश के दौरान पानी का स्तर अचानक और तेजी से बढ़ा. केदारनाथ आपदा के दौरान वैज्ञानिकों के पास जो रिकॉर्ड आए है, उससे ये पूरी घटना साफ होती है. पानी की इतनी बड़ी मात्रा में वृद्धि ने अन्य भू-भौतिक पैरामीटरों (Geophysical Parameters) पर भी असर डाला.

पानी की मात्रा बढ़ने से ग्राउंड वाटर में रेडॉन का स्तर बढ़ा: केदारनाथ में Geophysical Parameters के बदलने के कारण ही उस क्षेत्र में रेडॉन गैस के स्तर में भी असामान्य बदलाव देखा गया. बोरहोल के भीतर पानी की मात्रा बढ़ने से ग्राउंड वाटर में रेडॉन का स्तर बढ़ गया.

वहीं, बरसात के दौरान गहरी जल प्रवृत्ति (गहरे हिस्से में बहने वाली विशाल जल धाराएं, यह सतह पर चलने वाली हवाओं से नहीं, बल्कि पानी के घनत्व (Density) में बदलाव के कारण चलती हैं), मिट्टी में जमा गैस (soil gas) रेडॉन को नीचे की ओर ले गई, जिससे मिट्टी में रेडॉन गैस का स्तर कम हो गया.

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि फ्लैश फ्लड के दौरान रेडॉन काउंट्स औसत मान से दो गुना से अधिक तक पहुंच गया था, जो एक असामान्य प्रक्रिया थी. Power Spectrum Analysis और Residual Radon Data के बीच बारिश के समय अच्छा कोरिलेशन (Correlation) मिला. इससे साफ हुआ कि बारिश और भूजल के असर को हटाकर रेडॉन में असामान्य गतिविधि का आकलन करना संभव है.

दूसरे शब्दों में कहे तो रेडॉन मॉनिटरिंग जब सिस्मिक और वॉटर लेवल डेटा के साथ मिलती है, तो भूकंप के शुरुआती संकेतों का पता लगाने में मदद कर सकती है. क्योंकि भूकंप का अनुमान लगाने के लिए रेडॉन का इस्तेमाल करने में एक बड़ी चुनौती टेक्टोनिक एक्टिविटी से होने वाले बदलावों को पानी या मौसम की स्थिति से होने वाले बदलावों से अलग करना है.

रेडॉन एक रेडियो एक्टिव गैस है. ऐसे में जहां पर यूरेनियम और थोरियम के सोर्स होते हैं, वहां ये रेडॉन गैस निकलती है. अमूमन यह देखा गया है कि भूकंप से पहले रेडॉन गैस की मात्रा बढ़ जाती है या फिर घट जाती है. इसके प्रमाण गोरखा नेपाल भूकंप (अप्रैल 2015 में नेपाल में आया भूकंप) के दौरान भी देखने को मिला था. इसको लेकर पिछले 50 सालों से अध्ययन किया जा रहा है. इसको विश्व भर में अर्थक्वेक प्रिडिक्शन या अर्थक्वेक प्रिकर्सर (Earthquake Precursor) से काफी अधिक कोरिलेट किया गया है.
– डॉ नरेश कुमार, भू-वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट –

वाडिया इंस्टीट्यूट की ओर से साल 2007 में गुत्तू में मल्टी पैरामीट्रिक जियोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी लगाई गई थी, जहां से रेडॉन के साथ ही तमाम अन्य जानकारियां एकत्र की गई है, जिसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. इसको लगाने का उद्देश्य ही था कि अर्थक्वेक प्रिडिक्शन (Earthquake Prediction) किया जा सके. हालांकि, जब डाटा को अध्ययन किया गया तो पता चला कि रादों (रेडॉन) गैस सिर्फ अर्थक्वेक प्रेडिक्शन के लिए नहीं है, बल्कि सरफेस पर होने वाले वैरिएशन से भी संबंधित है.

रेडॉन एक मूवेबल गैस है: साल 2013 में केदारनाथ घाटी में आपदा के दौरान उस क्षेत्र में रेडॉन गैस की मात्रा काफी अधिक बढ़ गई थी. अध्ययन में पता चला कि आपदा के दौरान पानी में रेडॉन गैस की मात्रा काफी अधिक बढ़ गई थी, जबकि मिट्टी में रेडॉन गैस की मात्रा घट गई थी. ऐसे में इस अध्ययन से निष्कर्ष निकला है कि रेडॉन एक मूवेबल गैस है, जो पानी के साथ मूव हो जाती है. यही वजह है कि आपदा के दौरान रेडॉन गैस की मात्रा बढ़ गई थी. ऐसे में रेडॉन गैस को सिर्फ अर्थक्वेक तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता बल्कि टेक्टॉनिक फॉल्ट, मिट्टी की प्रॉपर्टी जानने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

इसके अलावा यह भी देखने की जरूरत है कि रेडॉन गैस की मात्रा, अर्थक्वेक की वजह से बड़ी या घटी है या फिर किसी अन्य वजह से रेडॉन गैस की मात्रा में बदलाव हुआ है. ऐसे में अगर रेडॉन गैस को भूकंप से जोड़ना है तो अन्य तमाम पैरामीटर को ध्यान में रखते हुए कोरिलेट करना होगा.

Continue Reading

Previous: मसूरी नवविवाहिता होमस्टे डेथ मिस्ट्री, महिला की मौत की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश, पढ़ें पूरी खबर
Next: टनकपुर में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे जत्थे का भव्य स्वागत, 11 राज्यों के 47 श्रद्धालु यात्रा में शामिल

Related Stories

अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन, 82 परिवारों के मकानों पर चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात

अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन, 82 परिवारों के मकानों पर चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात

October 31, 2026
जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, शेड्यूल पर डालें नजर, बर्फबारी और चुनावी राज्यों को मिली छूट

जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, शेड्यूल पर डालें नजर, बर्फबारी और चुनावी राज्यों को मिली छूट

October 31, 2026
पौड़ी से दिखा हिमालय का 360° पैनोरमिक व्यू, भूल जाएंगे दार्जिलिंग, गंगटोक और मनाली

पौड़ी से दिखा हिमालय का 360° पैनोरमिक व्यू, भूल जाएंगे दार्जिलिंग, गंगटोक और मनाली

October 31, 2026
https://youtu.be/nAT_GIt1h28
https://youtu.be/7qufZ7Uns2k

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

You may have missed

अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन, 82 परिवारों के मकानों पर चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात

अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन, 82 परिवारों के मकानों पर चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात

October 31, 2026
जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, शेड्यूल पर डालें नजर, बर्फबारी और चुनावी राज्यों को मिली छूट

जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, शेड्यूल पर डालें नजर, बर्फबारी और चुनावी राज्यों को मिली छूट

October 31, 2026
पौड़ी से दिखा हिमालय का 360° पैनोरमिक व्यू, भूल जाएंगे दार्जिलिंग, गंगटोक और मनाली

पौड़ी से दिखा हिमालय का 360° पैनोरमिक व्यू, भूल जाएंगे दार्जिलिंग, गंगटोक और मनाली

October 31, 2026
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, खरगे के आवास पर जुटेगा इंडिया गठबंधन

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, खरगे के आवास पर जुटेगा इंडिया गठबंधन

October 31, 2026

About Us

Founder – INDRA
Website – www.ukfastkhabar.com
Email – ukfastkhabar@gmail.com
Phone – +91-9917070725
Address –Naithani House, Lane No. 4 Devpuram Enclave, Badripur, Dehradun, 208005, Uk

Categories

BJP blog Dehardun Naitional National News Newsbeat Politics Tech World अपराध आपका शहर उत्तराखंड ऋषिकेश क्राइम खबर हटकर खेल चारधाम चारधाम यात्रा टेक्नॉलॉजी ट्रेंडिंग खबरें ताज़ा ख़बर ताज़ा ख़बरें दिल्ली दुर्घटना देश-विदेश देहरादून देहरादून/मसूरी धर्म-संस्कृति धामी सरकार नैनीताल न्यूज़ पर्यटन बाजार भारत मनोरंजन मौसम राजधानी दिल्ली राजनीति रुद्रपुर विदेश शिक्षा सोशल मीडिया वायरल स्वास्थ्य हरिद्वार

Recent Posts

  • अतिक्रमण पर बुलडोजर एक्शन, 82 परिवारों के मकानों पर चली ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात
  • जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान, शेड्यूल पर डालें नजर, बर्फबारी और चुनावी राज्यों को मिली छूट
  • पौड़ी से दिखा हिमालय का 360° पैनोरमिक व्यू, भूल जाएंगे दार्जिलिंग, गंगटोक और मनाली
  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी, खरगे के आवास पर जुटेगा इंडिया गठबंधन
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Copyright ©Uk Fast Khabar 2023, Design & Develop by Manish Naithani (9084358715). All rights reserved. | MoreNews by AF themes.